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पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे उपचुनाव बाद ही निकलेगी अपने विजयी महाभियान पर

पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे उपचुनाव बाद ही निकलेगी अपने विजय महाभियान पर

जयपुर। भाजपा में सत्ता की कुर्सी को लेकर रस्साकस्सी का खेल राज्य में होने वाले दो विधानसभा क्षेत्रों के उपचुनाव के बाद तेज होने की संभावना। इन उपचुनाव परिणामो के बाद पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी धार्मिक एवं सामाजिक यात्राओं के माध्यम से मिशन राजस्थान पर निकलेगी। इस यात्रा के दौरान राजे का प्रमुख धार्मिक स्थलों पर दर्शन करने तथा कोरोनाकाल तथा इस समयावधि के दौरान दिवंगत हुए प्रमुखजनों के घर पहुंच शोक संवेदना प्रकट करने का वृहद्ध स्तर पर कार्यक्रम हैं। इस यात्रा के दौरान ही विना किसी सभा किए वे अपने ममर्थकों से वन टॅू वन करेगी ताकि वे पूरी ऊर्जा से उनके साथ खड़े नजर आए। यह एक रूप का अनूठा शक्ति प्रदर्शन ही होगा।

इस फूल प्रूफ प्लान का रूट चार्ट तैयार किया जा रहा है, ताकि पूरे प्रदेश की यात्रा भी हो जाए और ये भी नहीं लगे कि पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व को चुनौती देते हुए किसी तरह का आयोजन कर रही है। स्वयं के पक्ष में समर्थन जुटाने के पीछे सोच है कि पूरे प्रदेश से एक ही आवाज आए कि भाजपा में वसुंधरा राजे को सीएम का उम्मीदवार घोषित किए बिना पार्टी सत्ता में नहीं लौट सकती।

राजे ने ही करवाया मेघवाल के लेटर बम प्रकरण को शांत

जानकारो की माने तो पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल के लेटर बम के कारण उपजे हालातों को शांत करने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने ही मध्यस्था की बताई और कालीचरण सराफ को मेधवाल के पास भेजा। सराफ ही उन्हें भाजपा मुख्यालय में अरूणसिंह के पास लेकर आए थे। राजे की बड़ी भूमिका के कारण ही डेमेज कंट्रोल हो पाया। हालांकि इस बात को प्रचारित नहीं किया गया। राजे नहीं चाहती कि माहौल खराब होने से उन पर किसी तरह का आरोप लगे। मेघवाल वर्तमान में पूर्व मुख्यमंत्री राजे खेमे के ही माने जाते हैंं।

उप चुनाव बाद ही धार्मिक एवं सामाजिक यात्रा क्यों

राजनीति के जानकारों का मानना है कि धरियावद व वल्लभनगर की जिन दो सीटों पर उपचुनाव होना है उसमें भाजपा को बड़ी सफलता नहीं मिलने वाली। परिणाम विपरित गए तो भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व को वर्तमान प्रदेश नेतृत्व में बदलाव तथा आगामी विधानसभा चुनाव की कमान किसी न किसी दूसे को सौंपनी पड़ेगी। उसमें सबसे मजबूत और उपयुक्त नाम वसुंधरा राजे का ही हैं।

उपचुनाव से पहले यात्रा पर निकलने से कई सवाल खड़े हो सकते हैं। राजे इस तरह का कोई संदेश देना नहीं चाहती जो शंका पैदा करें। वर्तमान में राजे परिवारिक कारणाों से व्यस्त भी है इसीलिए उपचुनाव के बाद का ही समय प्रदेश यात्रा पर निकलने का उपयुक्त माना गया हैं। चूंकी इन दोनों उपचुनाव की तिथि भी चुनाव आयोग ने घोषित नहीं की है,लेकिन राजनैतिक दलों की तैयारियो को देखते हुए माना जा रहा है कि शीघ्र उपचुनाव तिथि घोषित हो सकती है। उपचुनाव के बाद भी अगले चुनावों तक काफी वक्त है जिसमें काफी कुछ किया जा सकता हैं। राजे इसी के चलते फिलहाल शांत हैं।

 

 

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