जयपुर। कांग्रेस विधायकों से रायशुमारी में जो सवाल प्रभारी महासचिव अजय माकन की ओर से पूछे गए थे उनमें बाकी सवाल तो खेमे और गुट के हिसाब से दे दिए। किसी मंत्री से नाराजगी थी वह भी खुलकर बता दी पर जैसे ही ये सवाल आया कि आप आलाकमान के फैसले के साथ हो अथवा प्रदेश के नेता मुख्यमत्री अशोक गहलोत – पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट दोनों में किस नेता के साथ।
सवाल पर सकपका गए विधायक
इस सवाल को कई विधायक तो सही ढंग से समझ ही नहीं पाए तथा जिन्हें समझ में आया वे सकपका गए। उन्हें आखिर कहना पड़ा कि आलाकमान का फैसला शिरोधार्य हैं। इस सवाल को लेकर विधायकों में भी आपस में चर्चा होती रही कि ये सवाल आखिर क्यों पूछा गया है कहीं आलाकमान कोई बड़े बदलाव के मूड में तो नहीं। इस सवाल को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैँ। ये सवाल सभी विधायकों से पूछा गया या नहीं ये पता नहीं चल पाया।
मंत्री विधायकों को मैनेज करते नजर आएं
सबसे महत्वपूर्ण बात तो यह है कि मंत्रियों को जैसे ही पता चला कि अमुख विधायक ने उनके खिलाफ बोला हैं, वे उसे मैनेज करते नजर आएं। कठुमर से विधायक बाबूलाल बैरवा ने तो माकन के पास पहुंचने से पहले ही मीडिया से कह दिया कि हमें मंत्री तो नहीं बनना पर दूसरे विधायक उनके निर्वाचन क्षेत्रों में क्यों हस्तक्षेप करते हैं। बैरवा का इशारा वहां लगने वाले अधिकारियो को लेकर था तथा अलवर ग्रामीण से विधायक व श्रमराज्य मंत्री टीकाराम जूली पर निशाना था।
छवि धूमिल हो रही हैं
बताते है कि जूली ने जैसे ही इस बात की भनक लगी तो उन्होंने बैरवा से कहा बताया कि वे अधिकारियों को फोन कर देते है। वे अब आपकी ही सुनेंगे। इसी तरह एक मीडिया पर्सन के पास एक मंत्री का फोन आया कि आपकी एक लाइन से छवि धूमिल हो रही हैँ। रिपोर्टर ने भी पलटकर जवाब दिया बताया कि हम किसी की छवि कहां बना बिगाड़ रहे हैँं। करोड़ों रुपए खर्च करके छवि बनाने का काम तो प्रशांत किशोर कर रहा हैं।
क्या हुई गुप्तुगु
इस बीच माकन दिनभर रायशुमारी के बाद होटल के स्थान पर सीधे सीएमआर पहुंचे और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से चर्चा की। माकन के साथ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंदसिंह डोटासरा भी पहुंचे। तीनों के बीच क्या चर्चा हुई उसका तो पता नहीं चल सका,लेकिन विधायकों से मिले फीडबैक के बारे में ही औपचारिक रूप से बताया होगा। पहले दिन 66 विधायकों से फीडबैक जाना गया।

