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डेल्टा वैरिएंट के बढ़ते केसों से, भारत में कोरोना की तीसरी लहर का खतरा जल्द

नई दिल्ली: वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) ने दुनिया में थर्ड वेव शुरू होने का ऐलान कर दिया है। संगठन के चीफ डॉ. टेड्रोस गेब्रेयेसस ने बुधवार को देशों को चेतावनी दी कि वे कोरोना की तीसरी लहर के शुरुआती फेज में आ चुके हैं। उन्होंने दोहराया कि सिर्फ वैक्सीन से महामारी नहीं रोकी जा सकेगी। देशों को इससे निपटने के लिए लगातार सावधानी रखनी होगी। कई देशों ने दिखाया भी है कि इस वायरस को रोका जा सकता है।

इधर, भारत में भी इसका खतरा करीब दिखाई दे रहा है। एक विदेशी ब्रोकरेज फर्म ने आगाह किया है कि डेल्टा वैरिएंट के बढ़ते मामलों और वायरस के म्यूटेट होने से देश में कोरोना की तीसरी लहर की आशंका जल्द ही सच में बदल सकती है। भारत में कोरोना की तीसरी लहर को लेकर बड़े पैमाने पर चिंता जताई जा रही है। इस बीच डेल्टा वैरिएंट केसेज में इजाफा देखने को मिल रहा है। वहीं कोरोना के रूप में भी लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है। इसने भारत के लिए तीसरी लहर का खतरा और बढ़ा दिया है।

कोरोना की तीसरी लहर का खतरा जल्द

PTI की रिपोर्ट के मुताबिक UBS सिक्योरिटीज इंडिया की चीफ इकॉनमिस्ट तन्वी गुप्ता जैन का कहना है कि कोरोना की तीसरी लहर का खतरा ज्यादा दिखाई दे रहा है। आर्थिक गतिविधियों में लगातार इजाफा हो रहा है। वहीं कई राज्यों में भी लगातार कोरोना संबंधी कड़ाइयों में छूट दी जा रही है। इसने भी कहीं न कहीं खतरा बढ़ाया है। यूबीएस की रिपोर्ट के मुताबिक वैक्सीनेशन की रफ्तार में भी बीते दिनों में कमी आई है। जहां पहले हर रोज 4 लाख लोगों को कोरोना का टीका लगाया जा रहा था। वहीं अब यह आंकड़ा 3.4 लाख प्रति डोज रोजाना पर आ चुका है। वहीं कोरोना के कुल केसेज में से 45 फीसदी केस ग्रामीण इलाकों में मिल रहे हैं।

तीसरी लहर की चिंता और ज्यादा सताने लगी

रिपोर्ट में कहा गया है कि कम से कम 20 फीसदी जिलों में अभी भी दूसरी लहर की रफ्तार कम नहीं हुई है। यहां अब भी हर रोज बड़ी संख्या में कोरोना के मामले सामने आ रहे हैं। करीब एक महीने पहले यहां पर कोरोना के नए केसेज की रफ्तार घटकर 5% पर रह गई थी। इसके चलते भी तीसरी लहर की चिंता और ज्यादा सताने लगी है।

UBS की रिपोर्ट के मुताबिक, पहले भारत में औसतन 40 लाख डोज हर दिन लगाए जा रहे थे। अब यह संख्या 34 लाख तक आ गई है। यह स्थिति इसलिए भी खतरनाक है क्योंकि अब 45% केस ग्रामीण इलाकों में सामने आ रहे हैं।

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