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नेट-थियेट के संग फागुन के रंग: रंग रंगीलो फागण आयो, चहूॅं दिस गहरो आनंद छायो

नेट-थियेट के संग फागुन के रंग : रंग रंगीलो फागण आयो, चहूॅं दिस गहरो आनंद छायो

जयपुर। नेट-थियेट कार्यक्रमों की 87वी श्रृंखला में आज फागुन की बसंती बयार पूरे माहौल में मस्ती भर देती है और ग्रामवासी इस मस्ती का पूरा आनंद लेते हैं। होली का रंग जनमानस पर ऐसा जमता है कि लोग मदमस्त होकर नाचतें- गाते हैं।

नेट-थियेट के राजेंद्र शर्मा राजू ने बताया कि सुषमा पारीक और डॉक्टर प्रतिष्ठा पारीक ने जब सजनी कैसी खेली जाये अनोखी होली गीत गाकर रसिया को रिझाया, वही पूजा सोनी, प्रिया जैन और नीतिका जोशी ने अपने लुभावने नृत्य के जरिए इस फागुनी फुहार में रंग भरे।

पारंपरिक गणेश वंदना के बाद होली के गीतों की बरसात शुरू हुई और सुषमा पारीक और डॉक्टर प्रतिष्ठा पारीक ने कानूडो रंग डाल गयो मैं क्या करूं, महीनो फागण को आयो जैसी धमाल गाकर नेट-थियेट पर आनंद ले रहे दर्शकों को खूब रिझाया। उन्होंने राधा कृष्ण और सखियों के साथ होली भी सुनाई रंग मत डाले रे सांवरिया मारो गुजर मारे रे, तथा और रंग रंगीलो फागण आयो और आनंद छायो रे गाकर होली के रंग बिखेरे। कलाकारों ने जब फागुण के गीत गाये तो राधाकृष्ण ने फुलों की होली से चहूं होली की मस्ती को बिखेरा।

होली के इन गीतों पर घनश्याम प्रजापति ने हारमोनियम, गुलाम रशीद ने तबला तथा इमरान खान ने ढोलक पर तथा गुलाम हक ने कीबोर्ड पर ऐसा समां बांधा लोग होली की मस्ती में झूम उठे। कार्यक्रम का संचालन आर.डी.अग्रवाल ने किया। संगीत प्रभाव विष्णु जांगिड़ एवं प्रकाश मनोज स्वामी का रहा। मच सज्जा डा.मुकेश कुमार सैनी, जीतेन्द्र शर्मा, सौरभ कुमावत, अंकित शर्मा नोनू व गोविन्द तिवाडी ने कैमरा किया।

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