जयपुर। कांग्रेस के खुले अधिवेशन में मंत्री-विधायकों और सीएम के सलाहकारों ने अधिवेशन में खुलकर कमियां गिनाईं। सीएम के सलाहकार और नवलगढ़ से कांग्रेस विधायक राजकुमार शर्मा ने कहा कि हमारे मंत्री और अफसर कार्यकर्ता को शक की निगाह से देखते हैं। ब्लॉक से राजधानी तक कार्यकर्ता के काम होने चाहिए। हम रैली करते हैं या कोई कार्यकम करते हैं तो यही कार्यकर्ता काम करता है, उसे भी नीचे किसी को ऑब्लाइज करना होता है। हम कार्यकर्ता के काम करेंगे तभी तो फील्ड में उसके साथ लोग खड़े होंगे, आर्थिक युग है। कार्यकर्ता को शक की निगाह से देखना बंद कीजिए।
शर्मा ने सियासी संकट की तरफ इशारा करते हुए भी बहुत सी बातें कही जो आमजन की जुबान पर तो है पर बड़े नेता जानते हुए भी इन बातों की अनदेखी कर देते हैं। उन्होंने कहा- आपके पास तो उदाहरण है, कितने कितने प्रलोभन थे हमारे विधायकों के पास, लेकिन आपको और कांग्रेस पार्टी को छोड़कर नहीं गए। इतने प्रलोभन किसी को मिल जाए तो पत्नी पति को और पति पत्नी को छोड़ दे। हमें यह अधिवेशन दो दिन का रखना चाहिए था। विधायकों के साथ खूब सम्मेलन कर लिए अब कार्यकर्ताओं के सम्मेलन करने चाहिए।
शर्मा और अन्य नेताओं ने ब्यूरोक्रेसी पर भी जमकर भड़ास निकाली। शर्मा ने कहा- मैंने जिला अध्यक्ष को कार्यकर्ता के साथ कलेक्टर के पास भेजा। कलेक्टर ने कहा अध्यक्षजी आप अपना काम करा लो। मैं मंत्रियों के पास जाता हूं तो मंत्री कहते हैं आप खुद सीएम के सलाहकार हो। यह हालत है।
मंत्री मेघवाल के निशाने पर नौकरशाह रहे
सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री गोविंदराम मेघवाल ने कहा कि अफसरों को चुनाव के वक्त टिकट नहीं देनी चाहिए। ये लोग जिंदगीभर नौकरी करते हैं और फिर टिकट ले लेते हैं, जबकि पार्टी के लिए काम कार्यकर्ता करता है। मेहनत कार्यकर्ता करें और टिकट अफसरों को मिले तो ग्रासरूट पर वर्कर हताश होता है।
महाराणा प्रताप भी छाए रहे
अधिवेशन में महाराणा प्रताप और अकबर के बीच यृद्ध का प्रकरण भी उठा। दो दिन पहले कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के दोनों के बीच की लड़ाई को राजनीतिक और सत्ता का संघर्ष बताने पर विवाद के बीच मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास ने कहा कि अकबर के साथ राणा प्रताप की लड़ाई धार्मिक नहीं, स्वाभिमान की लड़ाई थी।

