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प्रसिद्ध शाही रेल गाड़ी पैलेस ऑन व्हील्स ट्रेन क्या अगले पर्यटन सत्र में पटरी पर उतर पायेंगी?

प्रसिद्ध शाही रेल गाड़ी पैलेस ऑन व्हील्स ट्रेन क्या अगले पर्यटन सत्र में पटरी पर उतर पायेंगी?

जयपुर : राजस्थान पर्यटन विकास निगम (आरटीडीसी) के नव नियुक्त अध्यक्ष धर्मेन्द्र राठौड़ ने घोषणा की है कि आरटीडीसी आगामी सितंबर माह में विश्व प्रसिद्ध शाही रेल गाड़ी “पैलेस ऑन व्हील्स” ट्रेन को फिर से शुरू करेगा लेकिन पिछलें क़रीब तीन वर्षों से लोको शेड में धूल फाँक रही यह रेल इतने कम समय में फिर से नए रंग रुप में पटरियों पर उतर पायेंगी अथवा नही? इसे लेकर राष्ट्रीय और अंतर राष्ट्रीय पर्यटक ऐजेंसियों से जुड़े लोगों में संशय बना हुआ है। उनका यह भी मानना है कि पर्यटन प्रदेश की अर्थ व्यवस्था की रीढ़ की हड्डी है इसलिए नीति-निर्धारकों द्वारा पर्यटन को जब तक व्यावहारिक नहीं बनाया जायेगा और इससे जुड़े लोगों को सही मायने में पार्ट्नर नहीं बनाया जायेगा तक इसके अच्छे परिणाम मिलना मुश्किल होगा।जबकि प्रदेश में पर्यटन की असीम सम्भावनाएँ मौजूद है और आज भी अनेक लेसर नोन डेस्टिनेशन और हेरिटेज सम्पदाएं है जहां पर्यटन विकास के काम कर बड़ी संख्या में सैलानियों को आमन्त्रित किया जा सकता है।

पर्यटन व्यवसाय से जुड़े इन लोगों ने कहा कि कोविड-19 वैश्विक महामारी के कारण यह मशहूर लग्ज़री ट्रेन पैलेस ऑन व्हील्स पिछलें क़रीब तीन वर्षों से बंद पड़ी है जिससे भारतीय रेल और राजस्थान पर्यटन को जहां करोड़ों रु. का नुक़सान हुआ है वहीं प्रदेश और देश के पर्यटन उध्योग को भी भारी धक्का लगा है।

आरटीडीसी,भारतीय रेलवे के साथ मिल कर संयुक्त रुप से पैलेस ऑन व्हील्स का संचालन करता आया है। यह ट्रेन विदेशियों और एनआरआई के बीच काफी लोकप्रिय है जोकि ट्रेन की करीब 90 फीसदी सीटों पर कब्जा कर लेते हैं। ट्रेन में 84 बर्थ हैं और यात्रा को पूरा करने में 8 दिन लगते हैं। ट्रेन का किराया 1100 अमेरिकन डालर प्रति यात्री प्रति रात्री है।एक पर्यटन सत्र में ट्रेन के करीब 39 फेरें होते है। इस हिसाब से ट्रेन को पिछलें तीन वर्षों में 50-60 करोड़ रु का नुक़सान हो चुका है।ट्रेन की आमदानी में भारतीय रेल और आरटीडीसी की बराबरी की भागीदारी रहती है।
पैलेस ऑन व्हील्स राजस्थान के प्रमुख शहरों की विश्व प्रसिद्ध विरासतों से होकर गुजरती है और राजस्थान के रेगिस्तान,टाईगर और पक्षी अभयारण्यों के साथ-साथ प्रदेश की सुन्दर झीलों के अलावा जग प्रसिद्ध ऐतिहासिक दुर्गों,महलों,मशहूर हवेलियों,स्मारकों आदि का दिग्दर्शन कराती है । साथ ही राज्य से सटे आगरा (उ.प्र.) में दुनिया के सात अजूबों में शामिल प्रेम के प्रतीक ताजमहल की सुन्दरता का दीदार सैलानियों को कराती है।
आरटीसीसी के अध्यक्ष बनने के बाद धर्मेन्द्र राठौड़ ने कहा कि पर्यटकों की आवाजाही के लिहाज से राजस्थान देश में एक अग्रणीय प्रदेश है। यहां के भव्य महल, किलें, हेरिटेज होटल, वन्य जीव अभ्यारण्य,झीलें आदि पर्यटकों को बरबस ही अपनी ओर आकर्षित करते हैं। पिछले दो तीन साल में कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन के कारण वैश्विक स्तर पर पर्यटन उध्योग काफी प्रभावित हुआ है। लेकिन धीरे-धीरे अब हालात नॉर्मल हो रहें है।
उन्होंने कहा कि यह सही है कि कोरोना संक्रमण से उत्पन्न परिस्थितियों की वजह से आरटीडीसी सहित प्रदेश में पर्यटन को काफी नुक़सान हुआ है लेकिन स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 500 करोड़ का पर्यटन विकास कोष बनाया है। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
साथ ही राजस्थान में पर्यटन विकास को बढ़ावा देने के लिए नई योजनाओं पर कामकाज किया जाएगा और शहरों एवं आसपास के पर्यटन सर्किट को जोडऩे के लिए योजना बनाई जाएगी। तारागढ़, पुष्कर, होकरा सहित अन्य क्षेत्र टूरिज्म पॉइंट बना विश्व प्रसिद्ध अजमेर को भी पर्यटन हब बनाने को प्राथमिकता दी जायेंगी।

राठौड़ ने लोकसभा के लिए राज्य की सभी 25 सीटों पर जीते भाजपा सांसदों पर तंज कसते हुए कहा कि अफ़सोस है कि केंद्र में उनके दल की सरकार है, फिर भी वे राजस्थान के लिए कुछ भी विशेष नहीं करा पा रहा हैं।विगत तीन साल में पुष्कर से मेड़ता रेलखंड के छोटे से हिस्से को नहीं जुड़वा सके हैं ।साथ ही अजमेर-पुष्कर के बीच ट्रेनों की संख्या भी नहीं बढ़वा सके हैं। वे इतना सा आधारभूत काम ही करा देंगे तो राज्य और जिले का पर्यटन स्वत: ही बढ़ जाएगा।

उल्लेखनीय है कि कोविड-19 महामारी ने दुनिया को काफी हद तक बदल दिया है। लाखों लोगों की जान लेने और दुनिया की अर्थव्यवस्था को बर्बाद करने के बाद भी कोरोना वायरस का प्रसार रुकता नहीं दिख रहा है। लगभग हर दूसरे दिन, वायरस अपना कुछ न कुछ नया वेरियेंट हिट करता है, और हमें यह सोचने पर मजबूर कर देता है कि सब चीजें कब सामान्य होंगी।

भारत की सबसे शानदार और प्रसिद्ध पैलेस ऑन व्हील्स ट्रेन ने भी इस वायरस का सबसे ज्यादा असर झेला है , क्योंकि यह शाही रेल क़रीब तीन साल पटरी पर नहीं उतरी है और आशंका बनी हुई है कि अगले पर्यटन सत्र में भी यह लग्ज़री ट्रेन चल पायेंगी अथवा नहीं?

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