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डोटासरा के महाराणा प्रताप और अकबर की लड़ाई को सत्ता का संघर्ष बताने पर विपक्ष हमलावार

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जयपुर: महाराणा प्रताप और अकबर के बीच हुई लड़ाई को सत्ता का संघर्ष बताकर एक बार फिर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने राजनीतिक गलियारों में नया मुद्दा खड़ा कर दिया है। नागौर के दौरे पर कांग्रेस संगठन के कार्यक्रम के दौरान डोटासरा के इस बयान को लेकर अब बखेड़ा खड़ा होता हुआ नजर आने लगा है। उनके इस बयान के आते ही भाजपा नेताओं ने पलटवार शुरू कर दिए हैं। उनके इस बयान पर केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत,भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया और प्रतिपक्ष के उपनेता राजेंद्र राठौड़ ने पलटवार किया है।

केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने डोटसरा को आड़े हाथों लेते हुए ट्वीट कर लिखा है कि मुगल अपने पीछे कांग्रेसी एजेंटों को छोड़कर चले गए। जो मातृभूमि के सम्मान की लड़ाई को सत्ता से जोड़ देते हैं। डोटासरा किस आधार पर कह रहे हैं कि राजस्थान के माथे का तिलक हमारे महाराणा प्रताप ने अकबर से सत्ता के लिए युद्ध किया था ? शेखावत ने कांग्रेस नेतृत्व सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि डोटासरा इटालियन कोचिंग से सीखा अपना इतिहास हमें न बांचें। महाराणा ने अकबर से स्वतंत्रता के लिए रण किया था। धर्म रक्षा का युद्ध किया था। मरुधरा के परचम को ऊंचा रखने की जंग की थी। शेखावत ने डोटासरा को चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि वह तुरंत माफी मांगें और अगली बार महाराणा का नाम अपनी सियासी जुबान पर न लाएं, यही अच्छा होगा।

पूनिया का पलटवार

बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने डोटासरा पर निशाना साधते हुए कहा महाराणा प्रताप का अकबर के साथ युद्ध सत्ता संघर्ष नहीं राष्ट्रवाद की लड़ाई थी। ट्वीट कर पूनिया ने लिखा कि डोटासरा जी आप पहले भी इस मामले पर विवादित बयान दे चुके हैं। आखिर मुस्लिम वोटों को खोने का इतना डर आपकी पार्टी कांग्रेस को क्यों है ? पूनिया ने बयान जारी कर कहा कि डोटासरा को मतिभ्रम है। महाराणा प्रताप और अकबर का युद्ध स्वाभिमान का युद्ध और देश की अस्मिता की रक्षा का संघर्ष था। लेकिन इससे पहले भी कांग्रेस अकबर को महान बताकर हिंदुवा सूरज वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप का अपमान कर चुकी हैल

राजेन्द्र राठौड़ ने कहा कांग्रेस की कुंठित मानसिकता

उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने भी ट्वीट कर गोविन्द सिंह डोटासरा से कहा है कि महाराणा प्रताप और अकबर की लड़ाई सम्प्रभुता, स्वतंत्रता और स्वाभिमान की लड़ाई थी। जो भारतीय संविधान के आदर्श हैं। ना कि सत्ता की लड़ाई थी। राजस्थान की आन बान शान के प्रतीक महाराणा प्रताप के खिलाफ बार-बार कुंठित मानसिकता का परिचय देना आपकी आदत में शुमार हो गया है।

ये कहा था डोटासरा ने

नागौर जिले के दौरे पर दो दिवसीय जिला स्तरीय कांग्रेस कार्यकर्ता प्रशिक्षण शिविर को सम्बोधित करते हुए डोटासरा ने कहा है कि बीजेपी ने अपने राज के दौरान विद्या भारती की तर्ज पर सिलेबस बनवाए। उन्होंने महाराणा प्रताप और अकबर के बीच हुई लड़ाई को धार्मिक लड़ाई बताकर सिलेबस में शामिल करवा रखा था, जबकि यह सत्ता का संघर्ष था। बीजेपी हर चीज को हिन्दू-मुस्लिम के धार्मिक चश्मे से देखती है। इससे पहले अपने शपथ ग्रहण के दौरान भी उन्होंने महाराणा प्रताप और अकबर को लेकर कहा था कि यह तो एक्सपर्ट ही बताएंगे कि दोनों में से कौन महान था। हालांकि बाद में उन्होंने बयान पर सफाई दी थी।

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