Headlines

वित्त वर्ष 2021-22 की तीसरी तिमाही में नई अक्षय ऊर्जा क्षमता विस्तार में लगभग 80 प्रतिशत की वृद्धि: सीईईडब्ल्यू-सीईएफ

वित्त वर्ष 2021-22 की तीसरी तिमाही में नई अक्षय ऊर्जा क्षमता विस्तार में लगभग 80 प्रतिशत की वृद्धि: सीईईडब्ल्यू-सीईएफ

नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2021-22 की तीसरी तिमाही के दौरान गैर-पनबिजली (नॉन-हाइड्रो) अक्षय ऊर्जा में नई क्षमता का विस्तार 3.4 गीगावाट बढ़ गया, जबकि पिछले साल इसी समयावधि में केवल 1.9 गीगावाट की अतिरिक्त क्षमता स्थापित की गई थी। साल-दर-साल समान अवधि के आधार पर देखें तो नई अक्षय ऊर्जा (आरई) क्षमता विस्तार में यह बढ़ोतरी लगभग 80 प्रतिशत है। यह जानकारियां सीईईडब्ल्यू-सेंटर फॉर एनर्जी फाइनेंस (सीईईडब्ल्यू-सीईएफ) मार्केट हैंडबुक के नए संस्करण से सामने आई हैं, जिसे आज जारी किया गया है। हालांकि, वित्त वर्ष 2021-22 की दूसरी तिमाही की तुलना में तीसरी तिमाही में नई नॉन-हाइड्रो आरई क्षमता के विस्तार में 27 प्रतिशत की गिरावट आ गई, जिसकी प्रमुख वजह आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी बाधाओं में बढ़ोतरी रही।

तीसरी तिमाही के दौरान कुल आरई क्षमता विस्तार में सौर ऊर्जा का हिस्सा 92 प्रतिशत रहा, जो कुछ हद तक 142 प्रतिशत उछाल के साथ 700 मेगावॉट रूफटॉप सोलर की स्थापना से संचालित था। पिछले वर्ष के मुकाबले सोलर पीवी मॉड्यूल की कीमत 40 प्रतिशत बढ़कर 21 रुपये प्रति वाट-पीक हो गई, इसके बावजूद नई क्षमता में यह बढ़ोतरी देखी गई। कच्चे माल की लागत में बढ़ोतरी और आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं के कारण सोलर पीवी मॉड्यूल की लागत बढ़ गई। हालांकि, हाल के बजट प्रस्ताव में, सोलर सेल और मॉड्यूल के स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए 19 हजार करोड़ रुपये से अधिक के अतिरिक्त प्रोत्साहन की घोषणा की गई है।

नेट क्षमता विस्तार के संदर्भ में, कुल मिलाकर इस अवधि में ऊर्जा क्षेत्र में जोड़ी गई कुल 4.5 गीगावाट (जिसमे से 900 मेगावॉट को कैप्टिव मोड में बदल दिया गया) की कुल क्षमता में अक्षय ऊर्जा का हिस्सा 75 प्रतिशत रहा। तीसरी तिमाही के दौरान राजस्थान, तमिलनाडु और बिहार में कोयला आधारित बिजली उत्पादन में 2095 मेगावाट क्षमता जोड़ी गई।

सीईईडब्ल्यू-सीईएफ के डायरेक्टर गगन सिद्धू ने कहा, “वित्त वर्ष 2021-22 की तीसरी तिमाही में नई आरई क्षमता विस्तार में वृद्धि आने वाले वर्षों में सतत विकास के बारे में सरकार के दृष्टिकोण के ही अनुरूप है। यह ऐसे समय में सामने आया है, जब बजट भाषण ने ऊर्जा परिवर्तन और जलवायु गतिविधियों को भविष्य के आर्थिक विकास के प्रमुख स्तंभों के रूप में रेखांकित किया है। भले ही हमने हाल के महीनों में ऊर्जा परिवर्तन की दिशा में बड़े पैमाने पर वित्तीय प्रवाह (finance flow) देखा है, लेकिन और ज्यादा वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता है, क्योंकि भारत के लक्ष्य काफी महत्वाकांक्षी हैं। सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड जारी करने का बजट प्रस्ताव इस अंतर को भरने में मदद कर सकता है। अगर यह घरेलू कॉरपोरेट ग्रीन बॉन्ड बाजार के विकास को बढ़ाने में भी मदद करे तो यह क्षमता को कई गुना बढ़ा सकता है।”

सीईईडब्ल्यू-सीईएफ की रिसर्च एनालिस्ट रुचिता शाह ने कहा, “सोलर मॉड्यूल की बढ़ती कीमतों और आसन्न बेसिक कस्टम ड्यूटी (imminent basic customs duty) के बावजूद, इस तिमाही में 2.17 रुपये प्रति किलोवाट के सबसे कम टैरिफ के साथ सौर ऊर्जा की संभावित दरों (tariff discovery) में गिरावट का रुझान बना रहा। आरई क्षमता विस्तार के लिहाज से, कुल स्थापित क्षमता में आरई का हिस्सा इस तिमाही में लगातार बढ़ते हुए लगभग 27 प्रतिशत पहुंच गया है। भले ही आरई क्षमता विस्तार की रफ्तार प्रशंसनीय हो, लेकिन इसमें सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी बहुत ज्यादा है और यह आगे चलकर पावर ग्रिड की स्थिरता के लिए खतरा हो सकता है। दो आरई प्रौद्योगिकियों के हाइब्रिड या पारंपरिक स्रोतों के साथ अक्षय ऊर्जा को मिश्रित करने जैसे विकल्पों को देखना एक स्थिर बिजली आपूर्ति व्यवस्था को सुनिश्चित करने के लिए बहुत जरूरी है।”

सीईईडब्ल्यू-सीईएफ हैंडबुक के अनुसार, इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री वित्त वर्ष 2021-22 की तीसरी तिमाही में 250 प्रतिशत से अधिक उछाल के साथ 1.3 लाख यूनिट से ज्यादा हो गई, जो पिछले वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में लगभग 34 हजार यूनिट थी। पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि, फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्यफैक्चरिंग ऑफ इलेक्ट्रिक एंड हाइब्रिड व्हीकल (फेम-2) के तहत प्रोत्साहन के साथ नए मॉडल्स की लॉन्चिंग जैसे कदमों ने शून्य-उत्सर्जन वाले वाहनों, विशेष रूप से इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की बिक्री बढ़ाने में योगदान दिया।

सीईईडब्ल्यू-सीईएफ हैंडबुक ने यह भी रेखांकित किया कि तीसरी तिमाही के दौरान पिछले वर्ष की इसी समयावधि की तुलना में कुल बिजली उत्पादन 3.7 प्रतिशत बढ़कर 324 बिलियन किलोवाट-घंटे (केडब्ल्यूएच) हो गया। ऐसा त्योहारी सीजन के दौरान आर्थिक गतिविधियां बढ़ने के कारण हुआ। वित्त वर्ष 2021-22 की तीसरी तिमाही के दौरान नीलाम की गई कुल अक्षय ऊर्जा क्षमता में पिछले वित्तीय वर्ष की तीसरी तिमाही की तुलना में 61 प्रतिशत की उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई। इस अवधि के लिए बिजली वितरण कंपनियों का कुल बकाया भी पिछले वित्त वर्ष में इसी अवधि की तुलना में सात प्रतिशत (7%) बढ़कर 1.23 लाख करोड़ रुपये हो गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *