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REET पेपर आउट प्रकरण: सफाई देने सुभाष गर्ग मीडिया के सामने आए, कहा- विरोधी कर रहे छवि खराब; डॉ. किरोड़ी को भी लपेटा

जयपुर: REET पेपर आउट को लेकर तेजी से बदल रहे घटनाक्रमों के बीच तकनीकी शिक्षा मंत्री डॉ. सुभाष गर्ग अपने ऊपर लग रहे गंभीर आरोपों पर सफाई देने मीडिया के सामने आए और कहा कि राजनीतिक विरोधी उनकी छवि खराब करने का प्रयास कर रहे हैं। गर्ग ने कहा कि जब मंत्रिमंडल विस्तार हुआ था तब भी खबरें चली थी कि उन्हें मंत्रिमंडल से हटाया जा सकता है. अब REET पेपर आउट के बहाने छवि खराब करने का प्रयास किया जा रहा है। वे पहली बार विधायक और मंत्री बने है। ऐसे में कुछ लोग जो ईर्ष्या रखते हैं. वह इस समय सक्रिय होकर काम कर रहे हैं।

उनका कहना था कि कोई भी गलती करें चाहे वह सुभाष गर्ग हो हो या कोई और उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। कानून अपना काम करेगा और कानून से ऊपर कोई नहीं है, लेकिन जांच एजेंसियों को स्वतंत्र रूप से काम करने दिया जाए। उनके ऊपर अनावश्यक रूप से दबाव नहीं बनाया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले को लेकर मीडिया ट्रायल के माध्यम से एक माहौल बनाया जा रहा है, जबकि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा सांसद किरोड़ीलाल मीना इस मामले में बार-बार बयान दे रहे हैं कि उनके पास कई सबूत हैं। उन सबूतों को भी एसओजी को अपनी जांच में शामिल किया जाना चाहिए।

सांसद किरोड़ी मीणा के संपर्क सूत्र की भी जांच हो 

उन्होंने कहा कि पेपर आउट को लेकर जितनी भी गैंग है उनके संबंधों को लेकर भी एसओजी को खुलासा करना चाहिए। रामकृपाल मीणा के सूत्र कहां तक जुड़े हुए हैं और उसे कैसे इस पूरे मामले में प्लांट किया गया, इसका भी खुलासा होना चाहिए। उन्होंने माफिया का उदाहरण देते हुए बताया कि जिस तरह गैंगस्टार एक दूसरे की गैंग को खत्म करना चाहते हैं। वैसे ही लग रहा है कि पेपर आउटकरवाने वाली गैंग्स एक दूसरे को खत्म करके अपना वर्चस्व स्थापित करना चाह रही है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक से जुड़ी गैंग के संपर्क सूत्रों को खंगाला जा रहा है । अभी इसमें उनके किस-किस राजनेताओं से संबंध है यह तलाश की जा रही है। गर्ग ने कहा कि सांसद किरोड़ी मीणा के संपर्क सूत्र कहां तक जुड़े हैं इस बात की भी जांच होनी चाहिए।

राजीव गांधी स्टडी सर्किल पर सवाल खड़े करने पर सुभाष गर्ग ने कहा कि किसी भी विचारधारा से जुड़े शिक्षक संगठन को जिम्मेदारी आज से पहले भी दी जाती रही है। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ और एबीवीपी को बीजेपी सरकार में तरजीह मिलती रही है। इनके पदाधिकारियों को भी बोर्ड में जगह दी गई है केवल राजनीतिक जलन के कारण जबरन मेरा नाम लिया जा रहा हैं।

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