नई दिल्ली: प्रधानमंत्री ने 3 जनवरी से 15 से 18 साल के उम्र को वैक्सीन शुरू करने की घोषणा की। यह कोरोना के खिलाफ लड़ाई को मजबूत तो करेगा ही, स्कूल-कॉलेज जा रहे बच्चों के माता-पिता की चिंता को भी कम करेगा। 10 जनवरी से 60 वर्ष से ऊपर की आयु के कॉ-मॉरबिडिटी वाले नागरिकों को, उनके डॉक्टर की सलाह पर वैक्सीन की बूस्टर डोज का विकल्प उनके लिए भी उपलब्ध होगा। उसके साथ ही हम सबका अनुभव है कि जो कॉरोना वॉरियर्स हैं, हेल्थकेयर और फ्रंटलाइन वर्कर्स हैं, इस लड़ाई में देश को सुरक्षित रखने में उनका बहुत बड़ा योगदान है।
वो आज भी कोरोना के मरीजों की सेवा में अपना बहुत समय बिताते हैं इसलिए उनकी वायरस से सुरक्षा की दृष्टि से सरकार ने निर्णय लिया है कि हेल्थकेयर और फ्रंटलाइन वर्कर्स को वैक्सीन की एहतियाती डोज भी प्रारंभ की जाएगी। इसकी शुरुआत भी 2022 में, 10 जनवरी, सोमवार के दिन से की जाएगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में जल्द ही नेजल और डीएनए वैक्सीन भी शुरू की जाएगी। प्रधानमंत्री के संबोधन से पहले DCGI ने बच्चों के वैक्सीन के लिए कोवैक्सिन के इमरजेंसी यूज को मंजूरी दे दी है।
प्रधानमंत्री ने कहा की आप सभी को क्रिसमस की शुभकामनाएं। हम इस वर्ष के अंतिम सप्ताह में हैं। नया वर्ष आने ही वाला है। आप सभी 2022 के स्वागत की तैयारी में जुटे हैं। लेकिन उत्साह और उमंग के साथ ही ये समय सचेत रहने का भी है। आज दुनिया के कई देशों में कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन की वजह से संक्रमण बढ़ रहा है। सावधान रहें, सतर्क रहें। मास्क का भरपूर प्रयोग करें। हाथों को समय समय पर धोना इस बात भूलना नहीं है।
आज जब वायरस म्यूटेट हो रहा है तो हमारा आत्मविश्वास भी मल्टीप्लाई हो रहा है। हमारी इनोवेटिव स्पिरिट भी बढ़ रही है। आज देश के पास 18 लाख आइसोलेशन बेड्स हैं. 5 लाख ऑक्सीजन सपोर्टेड बेड्स हैं। 1 लाख 40 हजार आईसीयू बेड्स हैं. आईसीयू और नॉन आईसीयू बेड्स को मिला दें तो 90 हजार बेड्स बच्चों के लिए हैं। आज देश में ऑक्सीजन प्लांट्स हैं। 4 लाख से ज्यादा ऑक्सीजन सिलेंडर देश में दिए गए हैं। राज्यों को पर्याप्त टेस्टिंग किट्स और दवाओं के बफर स्टॉक दिए जा रहे हैं।
दूसरा हथियार है वैक्सीनेशन। हमारे देश में भी इस बीमारी की गंभीरता को समझते हुए बहुत पहले वैक्सीन निर्माण पर मिशन मोड में काम करना शुरू कर दिया था। वैक्सीन पर रिसर्च के साथ ही अप्रूवल प्रोसेस, सप्लाई चेन, ट्रेनिंग, डिस्ट्रूीब्यूशन, सर्टिफिकेशन पर भी हमने निरंतर काम किया।
इन तैयारियों का ही नतीजा था कि भारत ने इस साल 16 जनवरी से अपने नागरिकों को वैक्सीन देना शुरू कर दिया था। ये देश के सभी नागरिकों का सामूहिक प्रयास और सामूहिक इच्छाशक्ति है कि आज भारत 141 करोड़ वैक्सीन डोज के अभूतपूर्व और बहुत मुश्किल लक्ष्य को पार कर चुका है। आज भारत की वयस्क जनसंख्या में 61 फीसदी से ज्यादा को दोनों डोज लग चुकी हैं। इसी तरह 90 फीसदी वयस्कों को वैक्सीन की एक डोज लगाई जा चुकी है।
