जोधपुर: बाड़मेर में आरटीआई कार्यकर्ता अमराराम पर हुए जानलेवा हमले के मामले को लेकर सीएम अशोक गहलोत काफी गंभीर हैं। सीएम अशोक गहलोत ने मामले की जांच सीआईडी से करवाने के निर्देश दिए हैं, साथ ही उन्होंने जोधपुर जिला प्रशासन को अमराराम को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के निर्देश के बाद जिला कलक्टर इंद्रजीत सिंह, डॉ.एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एसएस राठौड़, मथुरादास माथुर अस्पताल अधीक्षक डॉ एमके आसेरी ने अमराराम और उनके परिजनों से मुलाकात की और उनके स्वास्थ्य का हाल जाना। जिला कलक्टर ने परिजनों से भी वार्ता की। परिजनों ने एमडीएम अस्पताल की चिकित्सा सुविधाओं पर संतोष जताया।
जिला कलेक्टर इंद्रजीत सिंह ने बताया कि सीएम गहलोत के निर्देश के बाद आज उन्होंने आरटीआई कार्यकर्ता अमराराम और उनके परिजनों से मुलाकात की है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी तो राज्य सरकार अपने खर्चे पर अमराराम को अन्यत्र शहर में भी चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाएगी। साथ ही 2 लाख की आर्थिक सहायता भी मुख्यमंत्री सहायता कोष से दी गई है। जिला कलेक्टर इंद्रजीत सिंह ने बताया कि चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अमराराम को बेहतरीन चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाए।
जिला कलेक्टर को निर्देश देकर जोधपुर के MDM अस्पताल में भर्ती बदमाशों के हमले में घायल हुए बाड़मेर के RTI कार्यकर्ता श्री अमराराम के स्वास्थ्य की जानकारी लेने भेजा। परिजन उनके इलाज से संतुष्ट हैं। श्री अमराराम को मुख्यमंत्री सहायता कोष से 2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। pic.twitter.com/eM7qREl6bP
— Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) December 25, 2021
पीएम मोदी को लिखा पत्र
इस मामले में मुख्यमंत्री गहलोत ने प्रधानमंत्री मोदी को भी पत्र लिखा है। व्हिसलब्लोअर्स प्रोटेक्शन एक्ट के नियमों को लेकर पत्र लिखा है। RTI कार्यकर्ताओं पर हिंसा को लेकर सख्त नियम बनाने की मांग रखते हुए कहा कि सूचना प्रदाता संरक्षण अधिनियम-2011 संसद में पास हो चुका है। एक्ट में व्हिसलब्लोअर्स, RTI एक्टिविस्ट, सामाजिक कार्यकर्ताओं को सुरक्षा का प्रावधान था। अधिनियम की धारा 25 में केंद्र सरकार को नियम बनाने की शक्तियां दी गई थी, लेकिन केंद्र सरकार से अभी तक नियम बनाकर अधिसूचित नहीं किया गया। भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठा रहे कार्यकर्ताओं पर हो रहे अत्याचारों को रोका जा सके। अधिनियम के तहत सूचना प्रदाता संरक्षण अधिनियम 2014 को लागू करें, ताकि दोषियों के खिलाफ कठोर कानून बनाकर कार्रवाई की जा सके।
