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NHAI के रिटायर्ड़ अधिकारी आर. के. चावला हत्याकांड का पुलिस ने खोला राज

NHAI के रिटायर्ड़ अधिकारी आर. के. चावला हत्याकांड का पुलिस ने खोला राज

जयपुर : NHAI के रिटायर्ड़ अधिकारी आर. के. चावला हत्याकांड का राज खोलते हुए चार आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस टीम ने 100 पुलिसकर्मियों ने लगातार 9 दिन कार्य कर घटना का खुलासा किया है। कार्यवाही के दौरान करीब 500 CCTV कैमरा को खंगाला गया था। कंपनी के ही ठेकेदारों से 14 फुटओवर ब्रिज के डिजायन को लेकर विवाद चल रहा था। हरियाणा से 15 लाख रुपए में शूटर बुलाकर हत्या करवाई गई थी।

पुलिस कमिश्नर आनंद श्रीवास्तव ने बताया कि करणदीप श्योराण (29) पुत्र राजेंद्र श्योराण निवासी साकेत कालोनी हिसार हाल किराएदार गुरूग्राम, नवीन बिस्ला (31) पुत्र कर्मवीर निवासी गांव उरलाना पानीपत हरियाणा, विकास (33) पुत्र गजे सिंह निवासी हिसार सिटी हाल किराएदार गुरूग्राम, अमित नेहरा (26) पुत्र राजवीर नेहरा निवासी आलमपुर भिवानी हरियाणा हाल किराए गोल्फ सेक्टर 65 गुरूग्राम हरियाणा को गिरफ्तार किया है।

26 अगस्त को आरके चावला निवासी फरीदाबाद हरियाणा जयपुर में प्रोग्रेस मीटिंग में शामिल होने के लिए आए थे। मीटिंग के बाहर निकलते ही दो युवकों ने फायर कर हत्या कर दी। दोनों फरार हो गए। भागने के बाद पुलिस ने 500 से अधिक सीसीटीवी फुटेज खंगाले। काले रंग की फाच्यूर्नर में भागते हुए दिखाई दिए। उनकी पहचान नहीं हो सकी। तब पुलिस ने कंपनी के ठेकेदारों और कर्मचारियों से ही पूछताछ शुरू की।

मीटिंग में शामिल थे शूटर

मीटिंग में विकास और नवीन शामिल होने आए थे। ये दोनों शूटरों को गुरूग्राम से साथ लेकर आए। पहले ही बाहर आरके चावला को दिखा दिया। बाहर निकलते ही दोनों आरके चावला को मार दिया। बाद में विकास और नवीन ने गुरूग्राम पहुंच कर करणदीप को पूरी बात कहीं। पुलिस शूटरों की तलाश कर रही है।

मुख्य आरोपी करणदीप इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी का मालिक

गिरफ्तार करणदीप मुख्य आरोपी है और मैसर्स ई 5 इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी का मालिक है। विकास देवंदा और नवीन दोनों ही इंजीनियर है। ये करणदीप की कंपनी में काम करते है। इन्होंने आपस में ही बातचीत की। योजना बनाई कि आरके चावला कंपनी के कार्यों में काफी परेशान कर रहा है। इसे सबक सिखाना होगा। तब 15 लाख रुपए में दो शूटरों को आर. के. चावला सुपारी दी गई।

क्या था विवाद

गुरूग्राम से जयपुर तक 14 फुटओवर ब्रिज 35 करोड़ रुपए में बनने थे। इसका टेंडर करणदीप की कंपनी को मिला था। कंपनी ने समय पर प्रोजेक्ट पूरी नहीं किया। कंपनी पर 3.5 करोड़ की पैनल्टी लगा दी गई। करणदीप ने प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए समय मांगा था। इसीलिए जयपुर में मीटिंग का आयोजन किया गया था। इस मीटिंग में कंपनी के कर्मचारी, आरके चावला और NHAI हरीसिंह मौजूद थे।

 

 

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