जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच चल रही सुलह कोशिशों में ऐसा पेंच फंसा है कि कांग्रेस के 20 से 22 जिलाध्यक्षों की सूची तक अटक गई। कांग्रेस के प्रभारी महामंत्री अजय माकन के भी सारे दावे फैल हो गए। माकन ने जिला प्रभारियों को डेड लाइन दी थी और मोटे तौर पर माना जा रहा था कि 26 व 27 जुलाई को जहां विवाद नहीं है उन जिलों के कांग्रेस अध्यक्षो की घोषणा कर दी जाएगी। इस बीच उनका फिर राजस्थान दौरा 28 से 30 तारीख तक का बन गया। विधायकों से रायशुमारी करने आएं माकन ने जल्द ही जिलाध्यक्ष घोषित करने, राजनीतिक नियुक्तियों, मंत्रिमंडल की बात कहकर गए थे तथा यहां तक दावा किया था कि बहुत से मंत्रियों ने संगठन में काम करने की इच्छा जाहिर की है। इससे पहले केसी वेणुगोपाल को साथ लेकर आए थे तब भी कुछ इसी तरह के दावे किए गए थे, लेकिन माकन के सारे दावों की हवा निकल दावे फुस्स हो गए।
पायलट-गहलोत सुलह में पेंच फंसा
दिल्ली लौटने के बाद माकन ने कांग्रेस के हारे प्रत्याशी दुर्रू मिंया, महेन्द्रजीत मालवीय आदि से मुलाकात की थी तब तक तो लगा था कि कुछ पक रहा है पर अगस्त के 16 दिन निकल जाने के बाद भी कुछ नहीं हुआ तो जिलाध्यक्ष बनने वाले, राजनीतिक नियुक्तियों में अपने नम्बर की आशा लगाए बैठे सभी हताश हो अपने घर बैठ गए। मंत्रिमंडल में नंबर वाले भी शांत होकर बैठ गए इनमें पायलट समर्थकों के अलावा बसपा से कांग्रेस में आए विधायक तथा गहलोत सरकार को समर्थन देने वाले निर्दलीय विधायक भी शामिल है।
कोई 6 जिलों में हो रहे पंचायत चुनावों का बहाना बता रहे हैं तो कुछ नई तारीखों के कयास लगा रहे हैं। इस बीच एक सप्ताह जयपुर में स्टे के बाद पायलट भी शुक्रवार को वापस दिल्ली लौट गए। पायलट ने भी इन सब मामलों में चुप्पी ही साधे रखी। पायलट व गहलोत की इस चुप्पी के क्या मायने हैं ये तो पता नहीं चला, लेकिन सुलह में पेंच फंसा नजर आता हैं। ये पेंच कब निकलेगा उस पर ही कांग्रेस की सारी राजनीति टिकी हुई है।
