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Connecting Science to Villages: विज्ञान गाँवों की ओर… जयपुर के पास अभयपुरा में 15 को कार्यक्रम

जयपुर। देश के 75 वें स्वतंत्रता दिवस के अमृत महोत्सव कार्यक्रम की श्रंखला में विज्ञान भारती, राजस्थान तथा सीरी (CEERI- CSIR Pilani) जयपुर केंद्र द्वारा एम.एन.आई.टी. जयपुर, राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान जयपुर, विज्ञान प्रसार, लघु उद्योग भारती, पर्यावरण गतिविधि विभाग, सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया, कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर तथा उन्नत भारत अभियान के संयुक्त तत्वावधान में “विज्ञान गाँवों की ओर” नाम से जयपुर के निकट अभयपुरा ग्राम में 15 अगस्त रविवार सायं 4:00 बजे एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है, जिसका नारा है “आत्मनिर्भर भारत – आत्मनिर्भर गाँव”। यह कार्यक्रम कृषि, सामाजिक वानिकी, जल संचयन एवं संरक्षण, सौर ऊर्जा, कौशल विकास, खाद्य प्रसंस्करण, आयुर्वेद कैम्प्स, डिजिटल लाइब्रेरी, कचरा प्रबंधन, महिला उद्यमिता आदि विषयों पर केंद्रित होगा।

विज्ञान भारती, राजस्थान सचिव डॉ. मेघेन्द्र शर्मा ने बताया कि वस्तुतः विज्ञान अपने उपकरणों के साथ गाँव तक पहुंच तो गया है परंतु विज्ञान अभी भी ग्रामीणों के बीच एक पहेली ही बना हुआ है। बड़े शोध संस्थानों में काम करने वाले वैज्ञानिकों तक ही सुविधाएँ सीमित नहीं रहनी चाहिए बल्कि ग्रामीण विभाग के काम का भी बड़े पैमाने पर योगदान रेखांकित किया जाना चाहिए। गाँवों को मजबूत बनाने के लिए लोगों को विज्ञान के प्रति जागरूक करना बहुत आवश्यक है और यह जागरूकता उद्यमिता विकास के माध्यम से आएगी। गाँवों में उद्यमिता विकास के माध्यम से आत्मनिर्भरता उत्पन्न करने के साथ-साथ विज्ञान की सक्रिय पहुंच और वैज्ञानिक नवाचार की भावना को बढ़ाने की महती आवश्यकता है। इन्हीं विचारों के परिप्रेक्ष्य में यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम के अंतर्गत गाँवों में 75 पेड़ (जिनके कि औषधीय गुण हों) लगाने की शुरुआत 25 पेड़ लगाने से की जाएगी तथा हर पेड़ का संरक्षक गाँव का ही एक परिवार होगा।

Connecting Science to Villages: विज्ञान गाँवों की ओर... जयपुर के पास अभयपुरा में 15 को कार्यक्रम

ये है कार्यक्रम का उद्देश्य 

लाइव प्रदर्शन तथा पायलट परियोजनाओं, प्रदर्शनियों आदि के माध्यम से ग्रामीणों के बीच अपनाने योग्य और टिकाऊ प्रौद्योगिकी के बारे में जागरूकता फैलाने और प्रौद्योगिकियों और प्रथाओं को अपनाने के लिए संबल प्रदान करना, कौशल विकास डिजिटल और वित्तीय साक्षरता के माध्यम से आत्मनिर्भरता स्वरोजगार के लिए प्रशिक्षण प्रदान करना, गोद लिए गए गाँवों में पर्यावरण के अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना, नई प्रौद्योगिकियों एवं योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए विश्वविद्यालयों, प्रौद्योगिकी संस्थानों, अनुसंधान संस्थानों, कॉरपोरेट्स, सरकारी एजेंसियों और उद्योगों के लिए एक मंच प्रदान करना आदि।

इस कार्यक्रम में निम्न गतिविधियों पर फोकस किया जाएगा
  • सी.एस.आई.आर. प्रयोगशालाओं विशेष रुप से सीरी द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों जो कि गाँव के लिए उपयोगी है, का मल्टीमीडिया ऑडियो विजुअल तकनीक का उपयोग कर प्रदर्शन
  • वैज्ञानिक प्रयोगों के प्रदर्शन से मिथकों का निवारण
  • कौशल विकास प्रशिक्षण
  • कृषि खाद्य प्रसंस्करण आदि पर पायलट परियोजनाएं लागू करना
  • बुनियादी ढांचे का विकास करना
  • हैंड होल्डिंग पारिस्थितिकी तंत्र का विकास करना
  • चौपाल और बातचीत – ग्रामीणों के व्यक्तिगत और सामूहिक साक्षात्कार के माध्यम से समस्याओं की पहचान और रैंकिंग करना
  • मॉडल के रूप में सरकार की प्रमुख योजनाओं का कार्यान्वयन
  • वित्तीय और डिजिटल साक्षरता पर महिलाओं के लिए प्रशिक्षण
  • स्वास्थ्य और जीवन शैली शिविरों का आयोजन करना
  • बाजार की मांग के आधार पर एक उद्यमी पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना
  • निजी निवेशकों और नीति निर्माताओं से जुड़ने के लिए स्थानीय निकायों का उपयोग

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