जयपुर। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने वीर सावरकर का नाम लेकर देशभर में एक नया विवाद छेड़ दिया था अब उन्हीं की पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गोविंदसिंह डोटासरा ने सावरकर पर बयान देकर नई बहस छेड डाली। उन्होंने कहा कि हम इनकार नहीं करते कि स्वतंत्रता आंदोलन में वीर सावरकर शामिल नहीं हुए। आजादी से पहले हिंदू राष्ट्र की मांग भी जायज थी। सावरकरजी जो हिंदू राष्ट्र की बात करते थे, गुनाह नहीं करते थे।
सोमवार को अगस्त क्रांति दिवस पर प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में हुई विचार गोष्ठी और स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान समारोह में सावरकर को लेकर जो ताजा बयान दिया, वह उन्हीं की कांग्रेस पार्टी लाइन से कहीं मेल नहीं खाता। बीजेपी अब डोटासरा के बयान का हवाला देकर सावरकर और हिंदू राष्ट्र के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरेगी।
उस वक्त देश आजाद नहीं हुआ था
डोटासरा ने कहा- उस वक्त हमारा देश आजाद नहीं हुआ था। उस वक्त हमारा संविधान लागू नहीं हुआ था। आजादी से पहले अगर सावरकर हिंदू राष्ट्र की बात करते थे, तो गुनाह नहीं करते थे। देश आजाद हो गया और संविधान बन गया। सब धर्म-जाति के लोगों ने संविधान को स्वीकार कर लिया। उसके बाद उनकी विचारधारा को लेकर भाई से भाई को लड़ाने का षड़्यंत्र भाजपा-आरएसएस करते हैं। हम इनके मंसूबे कामयाब नहीं होने देंगे। डोटासरा अपने इस बयान के बाद कुछ संभले और कहा कि हमें यह समझना पड़ेगा कि सावरकरजी उस वक्त जेलों में गए। उसको कोई नकार नहीं रहा है, लेकिन जेलों में जाने के बाद उन्होंने अंग्रेजों को चार-चार बार दरख्वास्त दी। उन्होंने अंग्रेजों को खुद के जेल से बाहर आने पर उपयोगिता समझाई। वे लोग किस-किस तरह की सूचनाएं अंग्रेजों को देते थे, वह भी सबको पता है। हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने इसलिए बलिदान नहीं दिए कि इस तरह के लोग सत्ता में आएं, जो हिटलरशाही कर रहे हैं।
कांग्रेस शुरू से ही रही है हमलावर
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने एक तरह से सावरकर की आजादी के आंदोलन में भूमिका मान ली। आजादी से पहले हिंदू राष्ट्र की मांग को भी सही ठहरा दिया, जबकि कांग्रेस का हर नेता अब तक सांवरकर को अंग्रेजों का जासूस बताता रहा हैं। सावरकर की आजादी के आंदोलन में भूमिका को कांग्रेस सिरे से नकारती रही है। सावरकर को लेकर कांग्रेस शुरू से ही हमलावर रही है, लेकिन डोटासरा के ताजा बयान ने कांगेस को नई परेशानी में डाल दिया हैं।
