जयपुर : कोरोना मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाले गिरोह के एक और मास्टरमाइंड को कोतवाली थाना पुलिस ने हिमाचल प्रदेश में मनाली से गिरफ्तार कर लिया। डीसीपी (नार्थ) परिस देखमुख ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी मयंक गर्ग (30) पंजाब में श्री मुक्तसर जिले में पप्पी मार्केट मलोट का रहने वाला है। हाल ही DCP नार्थ ऑफिस में सायबर टीम प्रभारी कांस्टेबल मनोज कुमार, नंछूराम व कोतवाली थाने के विजय कुमार को तकनीकी अनुसंधान में 3 जुलाई को मयंक गर्ग के चंडीगढ़ में छिपे होने की जानकारी मिली। कोतवाली पुलिस टीम चंडीगढ़ पहुंची।
वहा जाकर पुलिस मयंक गर्ग को होटल में पकड़ती उससे पहले ही वो कमरा खालीकर भाग निकला। इसके बाद वह मयंक मनाली भाग गया। तब कोतवाली पुलिस टीम ने पहाड़ी क्षेत्रो के होटलों में सर्च किया। तब एक होटल में ठहरा हुआ मयंक गर्ग पकड़ा गया। उसे लेकर पुलिस टीम जयपुर आ गई है। मयंक ने अपने परिचित डॉक्टर जितेश अरोड़ा और अन्य तीन आरोपियों के साथ मिलकर जयपुर में रेमडेसिविर के नाम पर एक हजार से ज्यादा नकली इंजेक्शन बेचकर मोटा मुनाफा कमाया था।
जयपुर में कालाबाजारी गिरोह के पकड़े जाने पर सैंकड़ों इंजेक्शन नहर में फेंके
कोतवाली थानाप्रभारी विक्रम सिंह के मुताबिक आरोपी मयंक गर्ग भीका जी कामा प्लेस दिल्ली में मेडप्रो डिस्ट्रीब्यूटर तथा चंडीगढ़ में एडवांस मेडिकल सिस्टम नाम से फर्म खोलकर मेडिसन का व्यवसाय कर रहा है। इस मेडिकल व्यवसाय की आड में लालच व लग्जरी लाईफ जीने की नियत से नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन की ब्लैक मार्केटिंग करना शुरू किया। प्रारंभिक पूछताछ में मयंक गर्ग ने बताया कि जयपुर में गिरोह के सदस्यों की गिरफ्तारी के बाद सैंकड़ों नकली रेमडेसिविर इंजेक्शनों को फरीदाबाद नहर में फेंक दिया।
फिल्म कॉलोनी स्थित दवा बाजार में हुआ था गिरोह का भंड़ाफोड़
इस कालाबाजारी का खुलासा गत 21 अप्रेल को कोतवाली पुलिस ने किया था। पुलिस टीम ने चौड़ा रास्ता में फिल्म कॉलोनी स्थित दवा बाजार में मयूर टॉवर स्थित दक्ष डिस्ट्रीब्यूटर के रामावतार यादव को महंगे दामों पर रेमडेसिविर बेचते हुए गिरफ्तार किया था। इसके बाद शंकर सैनी को पकड़ा।
इन दोनों से पूछताछ में गुड़गांव के रहने वाले डॉ. जितेश अरोड़ा का नाम सामने आया। उसने ही करीब एक हजार इंजेक्शन रामावतार और शंकर सैनी को बेचने के लिए दिए थे। इसके अलावा डायरेक्ट निजी अस्पतालों को भी बेचा था। रामावतार से जब्त इंजेक्शन की सेंट्रल लैब में जांच करवाई गई तो सामने आया कि उन इंजेक्शनों में रेमडेसिविर की दवा ही नहीं थी।
