जयपुर: राज्य मंत्रिमंडल को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का फार्मूला पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट को मंजूर नहीं तो पायलट की कम से कम छह मंत्रियों की मांग सीएम को मंजूर नहीं। यहीं पर सारा मामला अटका पड़ा है। कांग्रेस के प्रभारी महामंत्री अजय माकन को इसी के चलते खाली हाथ लौटना पड़ा। मंत्रिमंडल विस्तार में सचिन पायलट खेमे से मंत्रियों की संख्या को लेकर मुख्यमंत्री सहमत नहीं हैं। गहलोत विधायकों की संख्या के अनुपात में मंत्री बनाने का तर्क दे रहे हैं, जबकि पायलट खेमा पहले से ज्यादा प्रतिनिधित्व मांग रहा है, गहलोत शेयरिंग फार्मूले पर राजी नहीं है।
स्थिति साफ नहीं
जानकार सूत्रों ने बताया कि माकन और गहलोत के बीच दो दिन तक हुए लंबे मंथन में राजनीतिक नियुक्तियों और संगठनात्मक नियुक्तियों पर तो सहमति बन चुकी है, लेकिन मंत्रिमंडल विस्तार में अभी स्थिति जस की तस बनी हुई है।
सचिन पायलट खेमे से मंत्री बनाने में शेयरिंग पैटर्न पर बात अटक गई है। अब तक पायलट कैंप को मंत्रिमंडल में उनकी मांगों के हिसाब से मंत्री बनाए जाने पर सहमति नहीं बनी है। गहलोत इस सुलह फार्मूले को मानने के लिए तैयार नहीं है, जबकि पायलट कैंप इस पर अड़ा हुआ है।
सहमति बनते ही मंत्रिमंडल विस्तार का रास्ता साफ
सचिन पायलट कैंप के विधायकों को मंत्री बनाए जाने के फार्मूले पर सहमति बनाने के लिए प्रभारी अजय माकन कवायद में जुटे हैं। सहमति बनते ही प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार का रास्ता साफ हो जाएगा। सचिन पायलट कैंप कुछ लचीला रुख अपनाये तो ही बात बन सकती है। सुलह समझौते को लेकर माकन की एक यात्रा निकट भविष्य में और हो सकती है।
