जयपुर। बीवीजी की आंच अभी ठंडी भी हुई नहीं हुई थी कि कमलेश प्रजापत मामला गर्मा गया। बीवीजी भाजपा पर भारी पड़ा तो कमलेश प्रजापत केस कांग्रेस की प्रदेश राजनीति को जबरदस्त प्रभावित कर सकता है। इस मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश राज्य की गहलोत सरकार ने कर रखी हैं। सीबीआई जांच की फाइल केन्द्र से राज्य सरकार की मंंजूरी के लिए आ चुकी बताई। जैसे ही इस मामले में सीबीआई जांच शूरू होगी उसके साथ ही राज्य के एक मंत्री हरीश चौधरी को इस्तीफा देना पड़ सकता हैं। चौधरी और उनके भाई पर कमलेश प्रजापत का एनकाउंटर करवाने का आरोप हैं।
माकन से होने वाली भेंट क्या गुल खिलाएंगी
ये आरोप लगाने वाले भी कांग्रेस विधायक मदन प्रजापत है और उन्हीं की मांग पर गहलोत सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश करके गृह मंत्रालय को पत्रावली दिल्ली भेजी थी। विधायक मदन प्रजापत दो अन्य कांग्रेस विधायकों अमीन खां व मेवाराम जैन के साथ कल से ही दिल्ली में है और वे कांग्र्रेस के राजस्थान प्रभारी अजय माकन से मुलाकात करने वाले हैं। इस मुलाकात को भी कमलेश प्रजापत प्रकरण से जोड़कर ही देखा जा रहा है, क्योंकि मदन प्रजापत के साथ मेवाराम जैन इस मामले में सीबीआई जांच की मांग कर चुके हैं।
बाड़मेर की राजनीति में भी चौधरी पड़े अलग-थलग
बताते है कि बाड़मेर की राजनीति में इस प्रकरण के कारण हरीश चौधरी अलग-थलग से पड़ गए हैं, क्योंकि अमीन खां भी जैन व प्रजापत के साथ दिल्ली गए हैं। पायलट समर्थक एक अन्य विधायक हेमाराम चौधरी पहले ही विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिए बैठे है हालांकि, उनका इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष ने अभी मंजूर नहीं किया हैं। दिल्ली गए ये विधायक कांग्रेस के राजस्थान के प्रभारी अजय माकन के जरिए हरीश चौधरी के खिलाफ कार्रवाई की मांग ही मुख्य रूप से करने तथा इसे कांग्रेस आलाकमान तक पहुंचाने का अनुरोध करने गए हैं।
पंजाब प्रभारी के रूप में विवाद भी पीछा नहीं छोड़ रहा
हरीश चौधरी पंजाब प्रभारी के नाते भी विवादास्पद रहे हैं। विधायको को पंजाब के मुख्यमंत्री अमरेन्द्रसिंह के खिलाफ बरगलाने का बड़ा आरोप भी इन पर लगा हुआ है। कांग्रेस में पंजाब का मामला भी इन दिनोंं हॉट पर चल रहा है। ऐसे में राजस्व मंत्री हरीश चौधरी को मंत्रिमण्डल से कभी भी इस्तीफा देना पड़ सकता हैं।
चौधरी कर रहे सभी आरोपों का खण्डन
चौधरी इन आरोपों का लगातार खण्डन कर रहे हैं, लेकिन कमलेश प्रजापत मामले में जो एनकाउंटर के वीडियों सामने आएं है उसमें एनकाउंटर पर सवालिया निशान लगा हुआ है। ये मामला इन तथ्यों के आधार पर सीबीआई जांच की मांग को लेकर हाईकोर्ट में गया हुआ हैं, लेकिन सरकार ने कोर्ट के किसी प्रकार के निर्देश आने से पूर्व ही इस प्रकरण को सीबीआई को सौंपने की सिफारिश केन्द्र को भेज दी।
इस्तीफे की असलीयत से जल्द पर्दा उठने की उम्मीद
राजस्व मंत्री हरीश चौधरी का जहां तक सवाल है। उच्च पदस्थ सूत्रों का यहां तक कहना है कि इस्तीफा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मांग लिया हैं। केवल उसे राज्यपाल के पास मंजूरी के लिए भेजना बाकी है, जबकि चौधरी किसी प्रकार के इस्तीफे से साफ इंकार कर रहे हैं।
आने वाले कुछ दिनों में राजस्व मंत्री हरीश चौधरी के इस्तीफे को लेकर असलीयत का पर्दा उठ जाने की उम्मीद हैं। सबसे मजेदार बात तो यह है कि मदन प्रजापत, अमीन खां व मेवाराम जैन गहलोत खेमे के है और हरीश चौधरी भी गहलोत खेमे से हैं। मुख्यमंत्री के खासमखास होने के कारण ही उन्हें बाड़मेर का मिनी मुख्यमंत्री कहा जाता रहा हैं। मिनी मुख्यमंत्री का तगमा भी हरीश चौधरी के विपरित गया हैं।
