जयपुर। अब पूर्व कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष नारायण सिंह भी कूद पड़े हैं और कहा कि कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और नेताओं ने खूब मेहनत करते हुए अपना पसीना बहाया है तब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी है। इसलिए आवश्यकता इस बात की है कि प्रदेश स्तर और जिला स्तर पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं को सत्ता में भागीदारी दी जाए, जिससे उनका मनोबल बढ़े।
यह नया भूचाल
राज्य में कांग्रेस के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट खेेमे के बीच जारी खींचतान नारायण सिंह का यह ताजा बयान भूचाल मचा देने वाला है। उन्होंने पायलट खेमे से सुर मिलाते हुए लिखित बयान जारी किया है। नारायण सिंह के बेटे वीरेंद्र सिंह दांतारामगढ़ से कांग्रेस विधायक हैं और इन दिनों उनका झुकाव सचिन पायलट की तरफ है। सिंह के इस बयान को भी इसी से जोड़कर देखा जा रहा हैं।
नारायणसिंह के बयान से बदल सकते है सियासी समीकरण
पूर्व पीसीसी अध्यक्ष नारायण सिंह ने तो यहां तक कह दिया कि ऐसा किया जाना कांग्रेस नेतृत्व की नैतिक जिम्मेदारी है। कांग्रेस आलाकमान को पुराने और निष्ठावान कांग्रेस कार्यकर्ताओं को जिन्होंने विपरीत हालातों में भी पार्टी का झंडा बुलंद रखा उनकी सुनवाई करनी चाहिए। नारायणसिंह नाम लिए बिना पायलट खेमे की पैरवी की बड़ी पैरवी इस बयान के माध्यम से कर गए।
डोटासरा की परेशानी भी बढ़ी
नारायणसिंह शेखावाटी क्षेत्र में बड़ी कद्दावर नेता माने जाते है अगर वे खुलकर पायलट के पक्ष में उतरे तो सियासी समीकरण काफी बदल सकते हैं। वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा नारायणसिंह के पुराने शिष्य रहे है। वे ही डोटासरा को राजनीति में लेकर आए थे। सीकर जिले से दीपेंद्र सिंह शेखावत पहले से ही पायलट खेमे में हैं। इससे डोटासरा की मुश्किलें भी काफी बढ़ गई हैं।
नारायण सिंह बनाम अशोक गहलोत
नारायण सिंह जब 2003 में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष बने थे तब से लेकर अपने पूरे कार्यकाल अशोक गहलोत के खिलाफ मोर्चा खोले रखे थे। दूसरी बार 2008 में सरकार बनी तब उनसे सुलह हुई। नारायण सिंह विधानसभा का चुनाव हार गए थे। पिछली गहलोत सरकार में नारायण सिंह को राज्य किसान आयोग का अध्यक्ष बनाया गया था। 2013 में नारायण सिंह दांतारामगढ़ से चुनाव जीते। 2018 में खुद की जगह बेटे वीरेंद्र सिंह को चुनाव लड़वाया। वीरेंद्र सिंह वर्तमान में दांतारामगढ़ से विधायक हैं।
