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गहलोत सरकार ने तीसरी-चौथी लहर से निपटने के लिए शुरू की तैयारियां

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जयपुर: चिकित्सा मंत्री ने कहा कि विशेषज्ञों और चिकित्सकों द्वारा देश भर में तीसरी और चौथी लहर के बच्चों के लिए ज्यादा खतरनाक होने की आशंका जताई जा रही है। साथ ही इस लहर को बच्चों के लिए खतरनाक होने की संभावना बताई जा रही है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर विभाग ने अभी से तैयारी करना शुरू कर दिया है। सरकार शॉट टर्म और लॉन्ग टर्म दोनों योजनाओं पर विस्तार से काम कर रही है। राज्य के सभी बच्चों के अस्पतालों में स्थित नीकू, पीकू, एसएनसीयू तथा मातृ एवं शिशु चिकित्सालयों में सेंट्रलाइज ऑक्सीजन सिस्टम विकसित करने, ऑक्सीजन जनरेटर प्लांट लगाने की योजना बनाने के निर्देश दिए हैं।

सभी सीएचसी में लगेंगे ऑक्सीजन जनरेटर प्लांट, 50 बेड से होगा उपचार

चिकित्सा मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में कोरोना को हराने के लिए सरकार कोई कसर नहीं छोड़ रही है। हाल ही मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रदेश के चिकित्सा विभाग के 249 ब्लॉकों में स्थित सीएचसी को सुदृढ़ करने के निर्देश मिले हैं। उन्होंने कहा कि सभी सीएचसी में ऑक्सीजन जनरेटर के प्लांट लगाने, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर पहुंचाने और रेमडेसिविर जैसी दवाएं उपलब्ध कराने के प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सभी सीएचसी में 50 बेडों से मरीजों का उपचार किया जा सकेगा ताकि जिला अस्पताल और राजधानी के अस्पतालों का प्रेशर कम हो सके। उन्होंने कहा कि सीएचसी की संख्या बढ़ानी भी पड़ी तो 350 तक बढ़ाई जा सकती है।

घर-घर जाकर बांटी जा रही दवा, लिए जा रहे हैं सैंपल

चिकित्सा मंत्री ने कहा कि पिछली लहर में बुजुर्ग और शहरी क्षेत्रों के लोग कोरोना से ज्यादा संक्रमित हो रहे थे लेकिन इस बार कोरोना गांवों और युवाओं तक भी पहुंच गया है। अब तक 7 लाख आईएलआई (वायरस के लक्षण वाले) लोगों को चिन्हित किया है। सरकार कोरोना के नियंत्रण में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है। विभाग द्वारा गांवों में टीमें बनाकर घर-घर जाकर सर्वे किया जा रहा है, जरूरी दवाइयों की किट बांटी जा रही हैं। आईएलआई केसेज, सिंप्टोमेटिक केसेज को चिन्हित किया जा रहा है।

एंटीजन टेस्ट से मिल सकेगी 15-20 मिनट में रिपोर्ट

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि प्रदेश में अब तक आरटीपीसीआर टेस्ट ही किए जा रहे हैं। प्रदेश की 68 जगहों पर 1 लाख 45 हजार टेस्ट प्रतिदिन करने की क्षमता विकसित कर और प्रतिदिन 99 हजार टेस्ट तक किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि गांवों में खांसी, जुकाम, बुखार के लक्षण वाले केसेज ज्यादा आ रहे हैं। ऐसे में उनकी तुरंत जांच के लिए राज्य सरकार ने एंटीजन टेस्ट करने को फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि जहां आटीपीसीआर टेस्ट की विश्वसनीयता 70 फीसद है तो एंटीजन टेस्ट की विश्वसनीयता 40 प्रतिशत ही है लेकिन एंटीजन से पॉजिटिव केसेज की पता 15 से 20 मिनट में ही चल जाता है। उन्होंने कहा कि नेगेटिव लेकिन लक्षण वाले लोगों के सैंपल का आरटीपीसीआर किया जा सकेगा। सरकार का ध्यान ज्यादा से ज्यादा टेस्ट कर फैलते संक्रमण को रोकने पर है।

विलेज कमेटियों हुई फिर से एक्टिव

डॉ. शर्मा ने कहा कि पिछले दौर में बनी विलेज कमेटियों ने पहली लहर में बेहतरीन काम किया था। अनुशासन बनाकर उन पर निगरानी के साथ अच्छा काम किया था। गांवो में बाहर से आने-जाने वालों पर निगरानी रखने की बात हो। गांवो में सरकारी स्कूल या भवन को सरकारी क्वारंटीन सुविधा विकसित की थी। वही काम अब फिर से किया जा रहा है।

 

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