हैदराबाद: यूनेस्को ने रविवार को तेलंगाना में स्थित काकतीय रुद्रेश्वर (रामप्पा मंदिर) मंदिर को विश्व धरोहर में शामिल कर लिया है। वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने इस सफलता पर कहा कि उत्कृष्ट! सभी को बधाई, खासकर तेलंगाना की जनता को। प्रतिष्ठित रामप्पा मंदिर महान काकतीय वंश के उत्कृष्ट शिल्प कौशल को प्रदर्शित करता है। मैं आप सभी से इस राजसी मंदिर परिसर की यात्रा करने और इसकी भव्यता का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त करने का आग्रह करूंगा।
क्या है मंदिर की खासियत?
तेलंगाना के काकतिया वंश के महाराजा गणपति देव ने सन 1213 में इन मंदिर का निर्माण शुरू करवाया था। मंदिर के शिल्पकार रामप्पा के काम को देखकर महाराजा गणपति देव काफी प्रसन्न हुए थे और इसका नाम रामप्पा के नाम पर रख दिया था। रामप्पा मंदिर को बनने में 40 साल का समय लगा था। छह फीट ऊंचे प्लैटफॉर्म पर बने इस मंदिर की दीवारों पर महाभारत और रामायण के दृश्य उकेरे हुए हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि उस काल में बने ज्यादातर मंदिर खंडहर में तब्दील हो चुके हैं, लेकिन कई आपदाओं के बाद भी इस मंदिर को कोई खास नुकसान नहीं पहुंचा है। यह मंदिर हजार खंभो से बना हुआ है। मंदिर में भगवान शिव के वाहन नंदी की एक विशाल मूर्ति भी है, जिसकी ऊंचाई नौ फीट है। शिवरात्रि और सावन के महीने में यहां काफी श्रद्धालु पहुंचते हैं।
Excellent! Congratulations to everyone, specially the people of Telangana.
The iconic Ramappa Temple showcases the outstanding craftsmanship of great Kakatiya dynasty. I would urge you all to visit this majestic Temple complex and get a first-hand experience of it’s grandness. https://t.co/muNhX49l9J pic.twitter.com/XMrAWJJao2
— Narendra Modi (@narendramodi) July 25, 2021
800 साल पुराने इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत है इसकी मजबूती। क्योंकि उस वक्त के ज्यादा मंदिर जीर्ण-शीर्ण हो चुके हैं। जब इसकी चर्चा हुई तो पुरातत्व वैज्ञानिकों ने मंदिर की जांच की। जब कुछ पता नहीं चला तो उन्होंने इसके पत्थर की जांच की। जांच में पता चला कि इस मंदिर को तैरने वाले पत्थरों से बनाया गया है। इस वजह से इसके पत्थर हल्के हैं और कम टूटते हैं। लेकिन ये अभी भी रहस्य है कि पानी में तैरनेवाले ऐसे पत्थर आये कहां से।
Kakatiya Rudreshwara (Ramappa) Temple in Telangana has been inscribed as a UNESCO World Heritage Site
(Photo credit: UNESCO) pic.twitter.com/Ps15vP7p8t
— ANI (@ANI) July 25, 2021
