जयपुर : राजस्थान विधानसभा सत्र में गहलोत सरकार को घेरने से पहले विधायक दल की बैठक में खुद बीजेपी अपनों से घिरी हुई नजर आई। विधानसभा के ना पक्ष लॉबी में हुई इस बैठक में भाजपा नेताओं के बीच रार नजर आई। बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया की गाड़ी पर हमले को लेकर बड़े नेताओं ने एकजुट होकर संघर्ष करने की चर्चा के बीच ही दुष्यंत सिंह के दफ्तर पर हुए हमले का मुद्दा उठ गया। पूनिया की गाड़ी पर हमले के मुद्दे पर सरकार को घेरने की चर्चा के बीच ही बारां-झालावाड़ सांसद दुष्यंत सिंह के दफ्तर पर हुए हमले के मामले में पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने नेताओं पर ही सवाल उठा दिए। बैठक में राजे ने भाषण नहीं दिया, लेकिन दुष्यंत सिंह के दफ्तर पर हमले के वक्त पार्टी की चुप्पी पर सवाल उठाए।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, विधायक दल की बैठक के दौरान सतीश पूनिया की गाड़ी पर हमले का एक परिवार की तरह एकजुट होकर संघर्ष करने की बात की गई। यह बात पूर्व सीएम वसुंधरा राजे को नागवार गुजरी। राजे ने नेताओं से कहा कि बारां में दुष्यंत सिंह के दफ्तर पर भी हमला हुआ था। उस वक्त परिवार वाली बात कहां चली गई थी? उस वक्त तो कोई कुछ नहीं बोला। उस वक्त पार्टी ने स्टैंड क्यों नहीं लिया? उस घटना में शामिल बीजेपी कार्यकर्ताओं पर अब तक कार्रवाई नहीं होने का हवाला देकर भी नाराजगी जताई।
वसुंधरा राजे ने बैठक के दौरान बोलने से मना कर दिया। उन्होंने औपचारिक तौर पर कोई भाषण नहीं दिया, लेकिन सतीश पूनिया की गाड़ी पर हमले को एकजुट होकर उठाने की बात को दुष्यंत सिंह के दफ्तर पर हुए हमले से तुलना करते हुए नेताओं पर सवाल उठा दिए। जिला परिषद चुनाव में बीजेपी की हार के बाद पार्टी के एक गुट के कार्यकर्ताओं ने दुष्यंत सिंह के दफ्तर पर तोड़फोड़ की थी। उस समय वसुंधरा राजे खेमे के अलावा बाकी नेताओं ने उतनी सक्रियता नहीं दिखाई और न धरने प्रदर्शन की घोषणा की थी। वसुंधरा धरने पर भी नहीं बोली तथा उसके समर्थक कई विधायक नदारद नजर आए धरना स्थल पर। कटारिया और राजे के बीच गुप्त मंत्रणा भी हुईं, लेकिन बातचीत का ब्यौरा नहीं मिल पाया।
