Headlines

सांसद हनुमान बेनीवाल ने संसद में मस्कुलर एट्रोफी के मुफ्त ईलाज, पेट्रोल-डीजल के दाम कम करने सहित कई मुद्दे उठाए

बेनीवाल

दिल्ली/जयपुर: लोक सभा में आज नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने लाईलाज बीमारी मस्कुलर एट्रोफी व डिस्ट्राफी से जूझ रहे बीमार बच्चो व वयस्को की समस्या व उनके इलाज की मांग को जोरशोर से उठाया। बेनीवाल ने सदन को बताया कि स्पाइन मस्कुलर एट्रोफी टाइप 1 से बच्चे के शरीर मे पानी की कमी होने लग जाती है। बच्चा स्तनपान नही कर पाता,और मस्कुलर डिस्ट्रॉफी जो एक प्रगतिशील बीमारी है जिसमे धीरे-धीरे इंसान के शरीर के अंग काम करना बंद देते है। एक समय ऐसा आता है जिसमे इंसान खुद से पानी भी नहीं पी पाता है। 16 करोड़ रुपये से अधिक कीमत का इंजेक्शन विदेश से आयात करना पड़ता है,इसलिए सांसद ने मांग रखी कि मुफ्त में इनका ईलाज हो ताकि निर्धन पीड़ित इलाज करवा सके। इस सम्बन्ध में उन्होंने दिल्ली उच्च न्यायालय में दायर याचिका में सरकार के प्रस्तुत आकंडो व लोक सभा में इसी मामले में प्रस्तुत जवाब में व्याप्त विसंगति को लेकर भी स्वास्थ्य मंत्री का ध्यान आकर्षित किया। साथ ही ऐसी बीमारियों के ईलाज के लिए भारत मे अनुसंधान को बढ़ावा देने की मांग भी रखी ताकि ऐसी दवाओं का निर्माण भारत मे भी हो सके।

अनुदान की पूरक मांगो पर कई मांगो पर रखा संसद में

सांसद हनुमान बेनीवाल ने लोक सभा मे मंगलवार को वर्ष 2021-22 की पूरक अनुदान माँगो पर हुई चर्चा में सरकार के बजट को लेकर विश्लेषण सहित कई मामलो को लोक सभा मे रखा। उन्होंने यूरिया की भारी कमी से राजस्थान सहित कई राज्यो के किसानों की समस्या से सरकार को अवगत करवाया। वहीं नागौरी पान मैथी को जीआई टेग देने तथा इसे मशाला कॉमोडिटी की श्रेणी में शामिल करने की मांग की ।

महंगाई को लेकर यह कहा

सांसद ने वित मंत्री को उनके बजट भाषण की तरफ आकर्षित करते हुए कहा कि उन्होंने एक करोड़ लोगो को उज्जवला योजना से जोड़ेंगे मगर गैस के दामों में हुई भारी बढ़ोतरी से आखिर कोई कैसे सिलेंडर भरवायेगा। उन्होंने पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों पर चिंता व्यक्त करते हुए इन पर नियंत्रण की मांग की।

इन मुद्दों पर भी रखी बात

सांसद ने पारम्परिक नदियों के बहाव क्षेत्र की हालात में सुधार करने व राजस्थान के लंबित अंतर राज्य जल विवादो को लेकर कहा कि इनके निस्तारण को लेकर केंद्र गंभीरता से रूचि नही दिखा रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि राजस्थान के नोहर में 200 के स्थान पर 30 क्यूसेक पानी छोड़ा गया, क्योंकि हरियाणा ने नोहर फीडर मे पानी की आवक अचानक घटा दी और इसका कारण यह था की पंजाब से नोहर फीडर का माँग के क्रम मे आवंटन पानी का नही दिया गया। इस कारण से किसानो की बारिया पीट गई। उन्होंने राजस्थान की भौगौलिक दृष्टि व रेगिस्तानी इलाके का हवाला देते हुए कहा की राज्य में कृषि व पशुपालन मूल व्यवसाय होने की वजह से यहां पानी की आवश्यकता अधिक है, क्योंकि वर्षा यहां सबसे कम होने के साथ-साथ यहां का तापमान अधिक रहता है। ऐसे हालातों के बाद भी राजस्थान के साथ पड़ौसी राज्यों का जल-विवाद बकाया रहना अशोभनीय है। उन्होंने रावी व्यास जल समझौता, अपर यमुना बोर्ड के निर्णय के क्रम राजस्थान को उसके हिस्से का जल आवंटन नहीं होने जैसे मामलो का हवाला देते हुए कहा कि राजस्थान को उसके हक का पानी नही मिल रहा है,इसलिए आप नदियो को जोड़ने के लिए अतिरिक्त बजट माँग रहे हो परन्तु आपको ऐसे विषयो पर भी ध्यान देने की ज़रूरत है।

रेल सेवा है तो फिर गैर अर्थक्षम बताकर योजनाओं को रोकना सही नही है

सांसद ने कहा कि कई बजट घोषणाओ मे नई रेल लाईनो के सर्वे की घोषणा होती है और बाद मे कह दिया जाता है की गैर अर्थक्षम होने के कारण इस कार्य को आगे नही बढ़ाया जा सकता जो अनुचित है। उन्होंने
फलौदी से नागौर तथा पीपाड़ से भोपालगढ़ -आसोप- संखवास होते हुए मुंडवा तक तथा नागौर से जायल होते हुए डीडवाना तक नई रेलवे लाइन स्वीकृत करने व मेड़ता पुष्कर रेलवे लाइन परियोजना को मूर्त रूप देने की मांग की। साथ ही नागौर,लाडनू,कूचामन,डीडवाना,

मकराना व नागौर जिले के ही मेडता व डेगाना मे स्थित रेलवे स्टेशनो पर बुजुर्ग व बीमार यात्रियो के लिए यात्री भार के नियमों में शिथिलता देकर एस्कलेटर लगाने की मांग की। ट्रेनों में सामान्य कोच लगाने व सभी ट्रेनों में जनरल टिकेट शुरू करने की मांग भी की। सांसद ने रेलवे की विभिन्न लंबित भर्तीयो को पूरा करने व रेलवे मे नई सरकारी नौकरियो के अवसर सृजित करने की मांग की ।

यह कहा राष्ट्रीय राजमार्गों को लेकर

सांसद ने सड़क ,परिवहन एव राजमार्ग मंत्री द्वारा वर्ष 2015 से लेकर 2017 के मध्य उनके राजस्थान से जुड़े दौरो मे की गई घोषणाओ की तरफ सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए राजस्थान मे 50 सड़क मार्ग जिनकी लंबाई 4772 किलोमीटर है, जिसमे फलोदी से होकर नागौर के नागौर-तरनाउ- खाटु,नारायणपूरा होते हुए दूदू-दौसा का खंड भी शामिल है। उन्हे राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित करने की सेद्धांतिक सहमति दी गई। उन घोषणाओ पर क्रियान्वयन नही हुआ। इस पर ध्यान देकर राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित किया जाए। साथ ही कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य सहित कई विषय राज्य से संबन्धित है ,लेकिन केंद्र को प्रत्येक बात यह कहकर नहीं टालनी चाहिए की यह राज्य का विषय है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *