Headlines

एयर इंडिया 68 साल बाद फिर हुई टाटा की, स्पाइसजेट के अजय सिंह ने टाटा से कम लगाई बोली

Air India returns to Tata after 68 years, SpiceJet's Ajay Singh bids less than Tata| एयर इंडिया 68 साल बाद फिर हुई टाटा की, स्पाइसजेट के अजय सिंह ने टाटा से कम लगाई बोली

नई दिल्ली: सरकारी एयरलाइन एअर इंडिया (Air India) टाटा ग्रुप की हो गई है। एअर इंडिया की बिक्री प्रक्रिया में Tata sons ने सबसे ज्यादा कीमत लगाकर बिड जीत ली है। सरकार ने एयर इंडिया के 100% हिस्सेदारी बेचने के लिए ऑक्शन किया। एअर इंडिया की दूसरी कंपनी एअर इंडिया सैट्स (AISATS) में सरकार इसी के साथ 50% हिस्सेदारी बेचेगी।

एअर इंडिया के लिए जो कमिटी बनी है, उसमें वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण, कॉमर्स मंत्री पियूष गोयल और एविएशन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया हैं। सूत्रों के अनुसार, एअर इंडिया का रिजर्व प्राइस 15 से 20 हजार करोड़ रुपए तय की गई थी।

एअर इंडिया के लिए टाटा ग्रुप (Tata Group) और स्पाइसजेट (SpiceJet) के अजय सिंह ने बोली लगाई थी। यह दूसरा मौका है जब सरकार एअर इंडिया में अपनी हिस्सेदारी बेचने की कोशिश कर रही है। इससे पहले 2018 में सरकार ने कंपनी में 76 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की कोशिश की थी लेकिन उसे कोई अच्छा रिस्पांस नहीं मिला था।

दिसंबर तक मिल जाएगी टाटा को!

सूत्रों के अनुसार एअर इंडिया की विनिवेश प्रक्रिया दिसंबर 2021 तक पूरी हो जाएगी। यानी दिसंबर तक यह कंपनी टाटा सन्स को सौंपी जा सकती है। Air India के लिए सरकार ने फाइनेंशियल बिड्स मंगवाई थीं। ये सरकार के विनिवेश कार्यक्रम का हिस्सा भी है। सरकार एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस की अपनी 100 फीसदी हिस्सेदारी, जबकि ग्राउंड हैंडलिंग कंपनी AISATS की 50 फीसदी हिस्सेदारी बेच रही है।

1932 में टाटा ने शुरू की थी Air India

Air India की शुरुआत 1932 में टाटा ग्रुप ने ही की थी. टाटा समूह के जे. आर. डी. टाटा (JRD Tata) ने इसकी शुरुआत की थी, वे खुद भी एक बेहद कुशल पायलट थे। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद भारत से सामान्य हवाई सेवा की शुरुआत हुई और तब इसका नाम Air India रखकर इसे एक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी बना दिया गया।

वर्ष 1947 में देश की आज़ादी के बाद एक राष्ट्रीय एयरलाइंस की जरूरत महसूस हुई और भारत सरकार ने Air India में 49% हिस्सेदारी अधिग्रहण कर ली। इसके बाद 1953 में भारत सरकार ने एयर कॉरपोरेशन एक्ट पास किया और Tata Group से इस कंपनी में बहुलांश हिस्सेदारी खरीद ली। इस तरह Air India पूरी तरह से एक सरकारी कंपनी बन गई।

टाटा संस को उठाना होगा 23,286.5 करोड़ रुपए के कर्ज का बोझ

साल 2007 में इंडियन एयरलाइंस में विलय के बाद से एअर इंडिया कभी नेट प्रॉफिट में नहीं रही है। एअर इंडिया में मार्च 2021 में खत्म तिमाही में लगभग 10,000 करोड़ रुपए का घाटा होने की आशंका जताई गई। कंपनी पर 31 मार्च 2019 तक कुल 60,074 करोड़ रुपए का कर्ज था। लेकिन अब टाटा संस को इसमें से 23,286.5 करोड़ रुपए के कर्ज का बोझ उठाना होगा।

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *