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निशाने पर कटारिया, असल लड़ाई वसुंधरा राजे को सीएम उम्मीदवार घोषित करवाने की

Kataria on target, real fight to get Vasundhara Raje declared CM candidate | निशाने पर कटारिया, असल लड़ाई वसुंधरा राजे को सीएम उम्मीदवार घोषित करवाने की

जयपुर। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल की प्रतिपक्ष के नेता गुलाब चंद कटारिया को घेरने की ये कोशिश केवल कटारिया तक सीमित नहीं हैं। सारा झगड़ा भाजपा से अगले मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर है। मेघवाल की भी रणनीति पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित करवाने के लिए राष्ट्रीय नेतृत्व पर दबाव बनाने की है। इसी रणनीति के तहत ही पूर्व मंत्री रोहिताश कुमार के बाद मेघवाल मैदान में कूदे हैं।

इसकी पटकथा काफी पहले ही लिखी जा चुकी है। मेघवाल भी मेवाड़ से आते हैं और मेवाड़ में कटारिया विरोधी नेताओं तथा राजे कौर टीम से विचार-विमर्श के बाद ही मेघवाल ने ये लेटर बम फोड़ा हैं। मेघवाल यूं तो पहले भी विधानसभा में पार्टी विरोधी रुख अपना चुके हैं, लेकिन इस बार वे आर-पार की लड़ाई लड़ने के मूड में है। इसके लिए वे विधायकी से इस्तीफे तक के लिए तैयार हैं।

इसके पीछे उनका सोच है कि 81 वर्ष की उम्र हो गई। पार्टी संगठन अगले चुनाव में वैसे भी टिकट देगी नहीं।इसी हानि-लाभ के चौघड़िए को जान बगावत पर उतरे मेघवाल ने पिछले दिनों कहा बताया कि सबसे अधिक मतों से मैं जीता। वरिष्ठता में भी किसी से कम नहीं। फिर भी नेता प्रतिपक्ष कटारिया को बना दिया गया।

मेघवाल वसुंधरा राजे के पक्ष में जनसमर्थन जुटाने मेवाड़ दौरे पर भी होकर आए हैं। वहां मेघवाल ने कहा बताया कि पार्टी ज्यादा से ज्यादा निकालेगी ही उसके लिए वे तैयार है। जानकारों की माने तो राजे को राजस्थान का नेतृत्व सौंपने की मांग आलाकमान से मनवाने की रणनीति के तहत कटारिया के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने का यह पत्र एक हिस्सा है।

कई राजनीतिक ड्रामे आने वाले दिनों में भाजपा में देखने को मिल सकते हैं। रोहिताश मामले में हुई किरकिरी के बाद मेघवाल को फुलप्रूफ प्लान के तहत मैदान में उतारा गया है। राजे समर्थक रणनीतिकारों का मानना है कि प्रदेश में भाजपा के खिलाफ माहौल देख भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व सोचने को अवश्य मजबूर होगा।

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