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गुजरात-राजस्थान सीमा पर आदिवासी भील धर्म गुरु श्री सती सूरमाल दास का राष्ट्रीय स्मारक बनें

गुजरात-राजस्थान सीमा पर आदिवासी भील धर्म गुरु श्री सती सूरमाल दास का राष्ट्रीय स्मारक बनें

नई दिल्ली: आदिवासी भील धर्म गुरु श्री सती सूरमाल दास सेवा संस्थान सती रामपुर डूंगरपुर राजस्थान के अध्यक्ष एल पी कोटेड ने अंतर राष्ट्रीय आदिवासी दिवस पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिख कर भारत सरकार के विभिन्न विभागों और उपक्रमों में संविदा पर काम कर रहे जनजाति समुदाय के शिक्षित युवक युवतियों को स्थाई करने तथा देश में ठेका पद्धति को समाप्त कराने की माँग रखी है।

उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न भागों में विशेष कर गुजरात राजस्थान और मध्य प्रदेश के सीमाओं से लगे भागों में अति पिछड़ें आदिवासी लाखों की संख्या में रोज़गार के प्रति वर्ष महानगरों की ओर पलायन कर रहे है। इन्हें आरक्षण का लाभ और हक़ भी पूरी तरह से नही मिल पा रहा है। ऐसी परिस्थिति में प्रधानमंत्री को आगे आ कर अति पिछड़ें पढ़े लिखे आदिवासी युवकों के लिए आज़ादी के अमृत महोत्सव के प्रारम्भ में लाल क़िला की प्राचीर से स्वतंत्रता दिवस पर अपने सम्बोधन में समुचित घोषणा करनी चाहिए।

आदिवासी भील धर्म गुरु थे श्री सती सूरमाल दास –

साथ ही आदिवासी अंचल में उदयपुर -खेरवाड़ा (उदयपुर ) – रतनपुर(डूंगरपुर)और शामलाजी (गुजरात ) मार्ग पर राजस्थान और गुजरात की सीमा के पास राष्ट्रीय राज मार्ग आठ से सटे लुसाड़िया गाँव में मानगढ़ (बाँसवाड़ा) में आदिवासियों के धर्म गुरु श्रीसती सूरमाल दास जी के शीष्य गोविन्द गुरु के स्मारक की तरह सूरमाल दास जी का भी राष्ट्रीय स्मारक बनाया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि क़रीब ढाई सौ वर्ष पहलें दक्षिणी राजस्थान के मेवाड़ और वागड़ के दुर्गम क्षेत्र में यह दिव्य पुरुष पैदा हुआ था जिन्होंने प्रामाणिक रूप से आदिवासियों में सामाजिक सांस्कृतिक और धार्मिक सुधारों के साथ साथ राजनीतिक क्रान्ति पैदा कर आज़ादी के आंदोलन की नींव रखने के साथ ही अपने चमत्कारों और भविष्य वाणियों से राजशाही एवं अंग्रेज़ी हकूमत की चूलें हिला दी थी। साथ ही उनकी ग़ुलामी कभी स्वीकार नहीं की। अंग्रेजों ने उनके चमत्कारों की परीक्षा के लिए उन्हें पिघलता हुआ सीसा पिलाया था लेकिन सन्त का कुछ नहीं बिगड़ा। लोक मान्यता है कि उनकी भविष्य वाणी के अनुसार सन्त का दूसरा प्रभावी रूप महात्मा गांधी में पूर्नजीवित हुआ। कोटेड ने सती सूरमाल दास सन्त के जीवन प्रसंगों को शिक्षा पाठ्यक्रम में शामिल करने की ज़रूरत बताई ताकि नई पीढ़ी को इस महापुरुष के जीवन से प्रेरणा मिल सकें।

पुस्तक भेंट

अन्तर राष्ट्रीय आदिवासी दिवस पर कोटेड ने महान तपस्वी योगेश्वर सन्त श्री सूरमाल दास जी पर सम्पादित अपनी पुस्तक पुष्पार्पण की प्रति जनसम्पर्क सलाहकार गोपेंद्र नाथ भट्ट को भेंट की। भट्ट ने कोटेड के प्रयासों की सराहना की और सन्त सूरमाल दास के जीवन पर और अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक ढंग से शोध की ज़रूरत बताई।

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