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कांग्रेस में सत्ता-संगठन के मर्ज का जल्द होगा इलाज; तैयारी में जुटा आलाकमान

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जयपुर। कांग्रेस हाईकमान ने एक सोची समझी रणनीति के तहत पंजाब के बाद ऑपरेशन राजस्थान शुरू किया है। कांग्रेस हाईकमान राजस्थान को लेकर बने सोच को भी अब बदलना चाहता है। इस सोच को बदलने की पीछे रणनीति साफ है,कहीं कोई इस मुगालते में ना रहे कि वह ही सब कुछ हैं। जो भी वह है उसका कद और पद हाईकमान और कांग्रेस की वजह से है।

मंत्रिमण्डल फेरबदल में देखने को मिल सकती है इसकी झलक

सचिन पायलट खेमे की बातें इसी के चलते सुनी जा रही हैं ताकि बेलेंस बना रहे। आने वाले दिनों में इसकी झलक दिख सकती है। राजस्थान में माकन की फीडबैक बैठकों में जो तथ्य सामने आए है उसके आधार पर राजस्थान में फिर से सत्ता में आने की मशक्कत कांग्रेस कर रही हैं। मंत्रिमण्डल फेरबदल और संगठन में होने वाली नियुक्तियों में इसकी झलक देखने को मिल सकती हैं। सब कुछ ठीक ठाक रहा तो जल्द इसी सप्ताह सत्ता-संगठन में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

राजस्थान को लेकर आलाकमान है गंभीर

जानकार सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस हाईकमान ने अगले विधानसभा और लोकसभा चुनाव पर अभी से फोकस करना शुरू कर दिया है, जिसके तहत अब कांग्रेस को ग्राउंड स्तर पर मजबूत करने का प्लान तैयार किया जा रहा है। राजस्थान को लेकर कांग्रेस हाईकमान कितना गंभीर है इसका अंदाजा अजय माकन के दो दिन के फीडबैक लेने के अंदाज से लगाया जा सकता है। अजय माकन ने रिपोर्ट तैयार करने में पूरी तरह गोपनीयता बरती है, विधायकों से वन टू वन बातचीत में केवल अजय माकन और उनका स्टेनो ही था, जिसे वे अपने साथ दिल्ली से लेकर आए थे।उसके बाद मंत्रिमंडल में बड़े बदलाव संभव हैं। नॉन परफॉर्मर, विवादित मंत्रियों का जाना भी इससे तय हो जाएगा। कुछ मंत्रियों को संगठन के पदों पर जिम्मेदारी दी जाएगी।

डेमेज कंट्रोल की कोशिश

सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस में भी पायलट खेमे की मांगों पर कार्रवाई के पीछे आलाकमान का सोच है कि जिलाध्यक्षों और ब्लॉक अध्यक्षों के साथ बूथ स्तर तक पार्टी की टीम खड़ा करने की रणनीति है। सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस हाईकमान के पास गहलोत सरकार के कई मंत्रियों के खिलाफ गंभीर शिकायतें पहले से थी। आलाकमान को ये भी जानकारी थी कि मंत्रियों की कारगुजारियों से सत्ता विरोधी लहर पनप रही है, समय रहते इसका डेमेज कंट्रोल नहीं किया तो हाथ से निकल जाएगी। बिगड़े हुए इन हालातों को देखते हुए ही माकन के साथ वेणुगोपाल को भेजा गया था ताकि समय रहते व्यवस्था को सुधारी जा सके।

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