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पंजाब में दस दिन में फैसला तो राजस्थान में क्यों नहीं

जयपुर। पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट और उनके समर्थकों ने लगता है कि इस बार राजस्थान से बाहर जाने की बजाय जयपुर में ही मोर्चा खोल दिया है। यूं तो हेमाराम के इस्तीफे से ही हलचल है जो पायलट के जयपुर आते ही आज एकाएक बढ़ गई। पायलट के सरकारी निवास पर आज जो गहमागहमी का दौर दिन भर रहा उसकी सियासी गलियारों में उसी की चर्चा रही। दिनभर पायलट और उनके समर्थक ही ट्रेंड करते दिखे।

हमारी निष्ठाओं पर सवाल उठाने वाले पार्टी हितेषी नहीं

सचिन पायलट खेमे के विधायकों ने 10 माह से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी सुलह कमेटी में उठाए मुद्दों का समाधान नहीं होने पर नाराजगी जताई है। सचिन पायलट समर्थक विधायक मुकेश भाकर, रामनिवास गावडिय़ा और वेद प्रकाश सोलंकी ने मंत्रिमंडल विस्तार, राजनीतिक नियुक्तियों में हो रही देरी को घेरा और साफ कहा कि कांग्रेस में रहकर संघर्ष करेंगे और पायलट के साथ मजबूती से खड़े रहेंगे। हम सब पार्टी की मजबूती के लिए ही आवाज उठा रहे हैं, पार्टी को लेकर हमारी निष्ठाओं पर सवाल उठाने वाले पार्टी के हितैषी नहीं हैं।

पायलट ने जो मुद्दे उठाए उन पर एक्शन होना चाहिए

पायलट के आवास पर मीडिया से बातचीत में वेद प्रकाश सोलंकी ने कहा- पंजाब में 10 दिन में ही सिद्धू की बात सुन ली, लेकिन राजस्थान में 10 महीने बीत जाने के बाद भी सचिन पायलट के उठाए गए मुद्दों का समाधान नहीं हुआ है। जब पंजाब में 10 दिन में सिद्धू की बात सुनी जा सकती है तो पायलट की क्यों नहीं? सोलंकी बोले- गहलोत चाहे तो अपने लोगों को बना दे लेकिन विस्तार और नियुक्तियां तो करें।

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कांग्रेस में रहकर ही जनता के मुद्दे उठाएंगे

इसी प्रकार विधायक मुकेश भाकर और रामनिवास गावडिय़ा बोले- हम लोग पायलट साहब के साथ मजबूती से खड़े हैं। आलाकमान को कार्यकर्ताओं से जुड़े मसले सुलझाने चाहिए। मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों में हो रही देरी से कार्यकर्ता हताश हो रहे हैं। हम कांग्रेस में हैं और कांग्रेस में रहकर ही अपनी आवाज उठाएंगे, जनता के मुद्दे उठाएंगे।
इन दोनों विधायकों ने कहा- भंवर जितेंद्र सिंह ने भी सोच समझकर ही बात कही है। 5 साल संघर्ष करने वाले नेताओं-कार्यकर्ताओं की आवाज को पायलट ने बुलंद किया। जिन लोगों का पार्टी के लिए योगदान है उन्हें उनका हक मिलना चाहिए। सुलह कमेटी के सामने आलाकमान ने जो वादे किए उन्हें पूरा करना चाहिए।

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