जयपुर। कांग्रेस विधायक हेमाराम चौधरी के इस्तीफे से आया तूफान अभी थमा ही नहीं कि इस बीच चाकसू से कांग्रेस विधायक वेद प्रकाश सोलंकी ने भी इस्तीफे की धमकी दे डाली। सोलंकी भी पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के खास सिपहसलार माने जाते हैं।
सोलंकी के इस बयान के बाद कांग्रेस की अंदरूनी सियासत में उबाल शुरू हो गया है। सोलंकी ने हेमाराम चौधरी का खुलकर समर्थन किया और कहा कि ज्यादातर विधायकों की हालत हेमाराम जैसी है। अकेले हेमाराम चौधरी ही पीड़ित नहीं हैं। इसमें किसी गुट की बात नहीं है। हर गुट के विधायको की कमोबेश यहीं स्थिति हैं। सीनियर विधायकों की सरकार में सुनवाई नहीं हो रही है। कई विधायक अंदर ही अंदर घुट रहे हैं, कई मजबूरी के कारण चुप हैं। जो सहन नहीं कर पाए उन्होंने खुलकर बोल दिया। हेमाराम से बर्दाश्त नहीं हुआ, इसलिए इस्तीफा दे दिया। मेरे कार्यकर्ताओं की सुनवाई नहीं होगी और काम नहीं होंगे तो मुझे भी इस्तीफा देना पड़ेगा।
वाजिब मांगो को नहीं सुना जा रहा
सोलंकी ने सवाल किया कि हेमाराम चौधरी से वरिष्ठ और ईमानदार विधायक कांग्रेस में कौन है। हाईकमान इस बात की जांच करें कि इतने वरिष्ठ और ईमानदार विधायक को इस्तीफा देने के लिए मजबूर क्यों होना पड़ा? मेरे जैसा जूनियर विधायक इस्तीफा देता तो फिर भी बड़ी बात नहीं थी। हेमाराम चौधरी की वाजिब मांगों और बातों को नहीं सुना जा रहा था, इसलिए इस्तीफा देने का कदम उठाना पड़ा।
सोलंकी बोले कि कांग्रेस हाईकमान को हेमराम चौधरी की वाजिब मांगों की सुनवाई करके उन्हें पूरा करना चाहिए। इतने सीनियर नेता को यूं नहीं छोड़ना चाहिए, उन्हें मनाना चाहिए। सचिन पायलट खेमे और खुद के अगले कदम के बारे में सोलंकी ने कहा, अभी तो सबसे बड़ा मुद्दा यही है कि हेमाराम चौधरी को मनाया जाए, उनकी बात को सुना जाए।
गुट और गुटबाजी अलग मामला
सोलंकी ने कहा, गुट और गुटबाजी तो अलग मामला है, यहां तो जो सरकार के नजदीक हैं वे विधायक भी परेशान हैं, उनकी भी सुनवाई कहां हो रही है। वरिष्ठ विधायकों की अफसरशाही नहीं सुन रही। मदन प्रजापत के बयान का जिक्र करते हुए सोलंकी बोले उनका कल ही बयान आया है वे भी दु:खी लग रहे थे। गौरतलब है कि इससे पहले राजेंद्र गुढ़ा को अपने क्षेत्र की जनता की पानी की मांग को लेकर जलदाय विभाग के चीफ इंजीनियर के दफ्तर में धरने पर बैठ चुके हैं। विधायक बाबूलाल बैरवा ने भी अपना दर्द खुलकर बताया था कि कैसे उनकी वाजिब मांगों की सुनवाई नहीं हुई।
सोलंकी पहले भी उठा चुके है सरकार के खिलाफ सवाल
वेदप्रकाश सोलंकी पहले भी सरकार के कामकाज पर सवाल उठा चुके हैं। विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सोलंकी ने रमेश मीणा के साथ एससी एसटी और माइनोरिटी के विधायकों की आवाज दबाने का मुद्दा उठाते हुए सरकार पर सवाल उठाए थे। सोलंकी ने इसके बाद एससी एसटी विधायकों को दमदार महकमों का मंत्री बनाने और राजनीतिक नियुक्तियों में जगह देने की मांग उठाई थी।
