नई दिल्ली। फिरोजपुर फीडर नहर से छोड़े गए पानी को पंजाब के मालवा क्षेत्र में तथा गंग नहर के माध्यम से राजस्थान के कुछ भागों में पेयजल व सिंचाई के लिए उपयोग किया जाता है,व इंदिरा गांधी नहर राजस्थान के पश्चिमी भाग के बाड़मेर, बीकानेर, चूरू, हनुमानगढ़, जैसलेमर, जोधपुर, श्रीगंगानगर व नागौर जिलों के क्षेत्रों में सिंचाई व पीने के पानी के उद्देश्यों के लिए जल प्रदान करने के लिए गुजरती है व पंजाब में तेजी से बढ़े शहरीकरण व औद्योगीकरण तथा शहरों के गंदे पानी व फैक्ट्रियों के गन्दे जल की नहरों में निकासी के कारण पानी दूषित हो जाता है।
यह बात गुरुवार को नागौर से आरएलपी सांसद हनुमान बेनीवाल के सवाल के जवाब में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने दी । सांसद ने अपने मूल सवाल में नदियों व नहरों में अपशिष्ठ प्रवाहित करने वाले शहरी प्राधिकरणों व औद्योगिक इकाइयों के विरुद्ध कार्यवाही करने को लेकर सरकार का पक्ष जानना चाहा था । यह भी कहा जवाब में जल शक्ति मंत्रालय ने कहा कि पर्यावरण (संरक्षण ) अधिनियम 1986 और जल (प्रदूषण संरक्षण व नियंत्रण ) अधिनियम 1974 के प्रावधानों के माध्यम से सीपीसीबी और सम्बन्धित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डो व समितियों द्वारा औद्योगिक बहिस्रावो के निष्काषन को मोनिटर किया जाता है।
जल निकायों में प्रदूषण निवारण नियंत्रण के लिए पर्यावरण (निवारण) नियम 1986 के तहत केंद्र सरकार से सामान्य निष्कासन मानक व उद्योग विशिष्ठ बहिस्रोव निष्कासन मानको को अधुसूचित किया है । विभाग ने यह भी बताया कि देश मे प्रदूषित नदियों नदी खंडो,के सम्बंध में मूल आवेदन 673/2018 में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी ) के आदेशों की अनुपालना के सम्बंध में राज्यो व संघ शासित प्रदेशों के द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने अधिकार क्षेत्र में उक्त खंडो की बहाली के लिए अनुमोदित कार्य योजना के कार्यान्वयन की जरूरत है। साथ ही केंद्रीय स्तर भी कार्य योजनाओ के कार्यन्वयन के लिए नियमित समीक्षा भी की जाती है।
नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने कहा जवाब में जल शक्ति मंत्रालय ने एक तरफ जल को राज्य का विषय बताकर सफाई व प्रदूषण नियंत्रण का जिम्मा स्थानीय राज्य सरकार का बताया। वहीं दूसरी तरफ केंद्रीय पर्यावरण प्रदूषण बोर्ड व केंद्र के नियमो तथा एनजीटी के आदेशों का भी हवाला दिया जा रहा। ऐसे में एक जवाब में दो तरह की बातों को लिखकर केंद्र अपनी जिम्मेदारी से बचने का प्रत्यन कर रहा है, जबकि ऐसे जनहित के मामले में जिसका संबंध में आम जन व पशुओ के स्वास्थ्य तथा फसलो से जुड़ा हो उस पर दृढ़ इच्छा के साथ ऐसी औद्योगिक इकाइयों के विरुद्ध सख्त कार्यवाही करने की जरूरत है जो नहरों में प्रदूषण का मुख्य कारण है ।
