गडामेडतिया की आदिवासी बेटी का अमेरिका निवासी अप्रवासी भारतीय अशोक भट्ट ने जसेला गाँव में किया कन्यादान

- वागड़ में सामाजिक सरोकारों एवं समरसता की आदर्श,अनूठी और अनुकरणीय पहल

@ गोपेंद्र नाथ भट्ट

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अशोक भट्ट

जसेला/रामसौर (डूंगरपुर)। दक्षिणी राजस्थान के उदयपुर संभाग के वागड अंचल में भीषण गर्मी के मध्य वैसे तो इन दिनों सावों के साथ-साथ राजनीतिक हलचलों की जबरदस्त धूम है। एक ओर गांव कस्बे और शहर से लेकर बाजार तक सावों एवं शादियों से गुलजार है वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के चिन्तन शिविर के कारण राजनीतिक माहौल गर्म है । इस मध्य डूंगरपुर जिले के सागवाडा और गलियाकोट उपखंड क्षेत्र के गडामेडतिया ग़ांव की संगीता राणा की शादी सुर्खियों में है। जसेला के मूल निवासी अप्रवासी भारतीय और केलिफोर्निया (अमरीका ) के पूर्व वाटर कमिश्नर अशोक भट्ट ने वागड़ अंचल में सामाजिक सरोकारों और समरसता की एक ऐसी मिसाल पेश की है जिसे सुन कर और देखकर हर कोई अचंभित हो रहा है। अमेरिका के अशोक भट्ट ने अपने पैतृक गांव जसेला के समीप गडामेडतिया की गरीब आदिवासी बेटी संगीता राणा को गोद लेकर उसकी शादी का पूरा खर्चा वहन करते हुए उसका आदिवासी और आधुनिक सामाजिक रीतिरिवाजों और रस्मों के साथ कन्यादान किया है। भट्ट के इस मानवीयता और इंसानियत से भरे कार्य की चंहुओर और सर्व समाजों में प्रशंसा हो रही है।

जसेला गाँव में हुई इस अनूठी शादी के साक्षी बाँसवाड़ा डूंगरपुर के सांसद कनकमल कटारा, डूंगरपुर की जिला प्रमुख सूर्या अहारी, पूर्व सांसद ताराचंद भगोरा, डूंगरपुर नगरपरिषद के पूर्व अध्यक्ष के के गुप्ता, सागवाडा के पूर्व विधायक लाल शंकर डिंडोर,गलियाकोट के प्रधान जयप्रकाश पारगी, उपप्रधान कमला डिंडोर, जाने माने जनसम्पर्क विशेषज्ञ गोपेंद्र नाथ भट्ट, डाँग के घनश्याम भाई पटेल,चिकित्साविज्ञ डॉ. स्मिता जोशी, डॉ केतन जोशी, डॉ शुक्ला रावल, योग विशेषज्ञ चंद्रा मलिक सहित कई वरिष्ठ अधिकारी सम्मांनीय विशिष्टजन और हज़ारों की संख्या में लोग मौजूद थे।

माता-पिता का सपना था- अशोक भट्ट

अशोक भट्ट के पिछलें चालीस वर्षों से अमेरिका में ही रहने के कारण उनके पिता गौरीशंकर भट्ट एवं माता बाँ बनारसी देवी अपने पैतृक गांव जसेला में रहते थे। तभी से उनके माता-पिता के काम मे हाथ बंटाने के साथ-साथ बचपन से ही संगीता उनके परिवार का हिस्सा बनकर उनके परिवार में रहती थी। संगीता को बेटी की तरह की रखकर उसकी शिक्षा दीक्षा पूरी करवाई। तभी से उनकी इच्छा एवं सपना था की वह इसका कन्यादान भी रीति-रिवाजों के साथ स्वयं करवाएं। इसी सपने को पूरा करने के लिए भट्ट अमेरिका से स्वेदश लौटकर पूरे सामाजिक रीति रिवाजों से संगीता की शादी शाही ढंग से की और उसका खर्च स्वयं वहन कर उसके हाथ पीले किए और मुकेश कटारा के साथ उसका विवाह कराया।।विवाह समारोह में मेवाड़ भील कौर सहित अन्य कई बैंड बाजे और भव्य आतिश बाजी के साथ भव्य पांडाल में बारात का भव्य तरीक़े से स्वागत सत्कार किया गया।

राखी पर आने का दिया न्यौता

कन्यादान के बाद अशोक भट्ट ने बेटी संगीता से एक वचन लिया कि वह हर रक्षाबंधन के अवसर पर अपने ग़ांव के भाइयों को राखी बांधने आए। साथ ही दूल्हे के पिता अर्जुनलाल कटारा सहित अन्य रिश्तेदारों से बात कर बेटी संगीता का ध्यान रखने का आग्रह किया।

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