श्रीगंगानगर: तोलियासर गांव के चंदन सिंह राजपुरोहित जो तोलियासर गांव के पहले डॉक्टर बने। प्रारभिक शिक्षा गांव के स्कूल से प्राप्त की। चंदनसिंह का सपना डॉक्टर बनने का था। दसवीं में 78 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। गांव के कुछ लोगों से सलाह ली उन्होंने कहा कि ये संभव नहीं इसमें बहुत पैसा लगता है।
एक बार तो लगा कि डॉक्टर बनने का सपना ही रह जायेगा। एक दिन चंदनसिंह ने अपने मामा रामकुमार राजपुरोहित से बात की जो की श्रीगंगानगर में सूचना जनसंपर्क अधिकारी के पद पर कार्यरत है। उन्होंने बताया की आगे क्या ज्यादा पैसे की भी आवश्यकता भी नहीं होगी। तब नए जोश और उत्साह के साथ डूंगरगढ़ के भारती निकेतन स्कूल में प्रवेश लिया पर वहां की फीस भी ज्यादा लगती थी।
जब स्कूल जाता तो दोस्त मजाक उड़ाया करते थे की डॉक्टर बनेगा। तब मां ने हौसला बढ़ाया। उन्होंने कहा की किसी को जवाब मत दो कुछ बनके दिखाओ। मां की इस बात से हौसला बढ़ा और 12 वी में 80 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। उसके बाद सिथेसीस अच्छे परिणामों को देखते हुए वहा प्रवेश लिया। किंतु कुछ अंको से एमबीबीएस से वंचित रह गया। हिम्मत करके एक प्रयास और किया। पिछले वर्ष की कमियों को दूर किया और अच्छा परिणाम मिला। अपनी रेंक पर गुजरात के सूरत मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लिया। और शानदार सफलता प्राप्त की। चंदनसिंह राजपुरोहित को शानदार उपलब्धि के लिए हार्दिक शुभकामनाएं।
