जयपुर। भाजपा ने आज भारतीय डाक सेवा के वर्ष 2011 बैच के अफसर प्रतीक झांझडिय़ा के रिश्वत मामले को मुद्दा बनाते हुएं गहलोत सरकार को घेरने की कोशिश की। विधानसभा में प्रतिपक्ष के उपनेता राजेंद्र सिंह राठौड़ ने सवाल उठाया है कि झांझडिया को लेबर कमिश्नर किस आधार पर बनाया गया? सोशल मीडिया पर बैक टू बैक दो पोस्ट करते हुए राठौड़ ने राजस्थान में पदस्थापन कराने वाले कथित नेताओं से प्रतीक के रिश्तों पर पूछा और कहा कि ये रिश्ता क्या कहलाता है?
प्रतीक झांझडिय़ा भारतीय डाक सेवा के अधिकारी है और वे डाक सेवा के पदों पर ही पदस्थापित हो सकते थे। केंद्र की सेवाओं से जुड़े झांझडिय़ा राज्य में कांग्रेस सरकार आने के कुछ महीने बाद ही आ गए थे। श्रम आयुक्त का पद आमतौर पर आईएएस अधिकारी को दिया जाता है, न कि भारतीय डाक सेवा के अधिकारी को। इसके बाद भी झांझडिय़ा को श्रम आयुक्त बना दिया गया। इतना ही नहीं झांझडिया को राजस्थान स्किल डेवलपमेंट के एमडी भी बना दिया गया।
राठौड़ ने ट्वीटर के माध्यम से घेरते हुए पूछा कि प्रतीक के मारवाड़ के किस नेता से सम्पर्क हैं। मारवाड़ में जोधपुर आता है, जहां से सत्ता के सबसे बड़े नेता मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ही हैं।

झाझडिय़ा पर कार्रवाई की सरकार को भनक तक नहीं लगी
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने शुक्रवार रात श्रम विभाग के लेबर कमिश्नर प्रतीक झांझडिय़ा को 3 लाख रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। यह कार्रवाई वसुंधरा राजे सरकार में आईएएस अशोक सिंघवी की तरह हुई। झाझडिय़ा के खिलाफ कार्रवाई की सरकार को भनक तक नहीं लगने दी।
