जयपुर। देवस्थान विभाग द्वारा आमेर रोड़ जल महल के सामने स्थित श्री बलदेव मंदिर पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सोमवार को कथा, हवन और भण्डारे के साथ संपन्न हो गई। उद्योग व देवस्थान मंत्री श्रीमती शकुंतला रावत ने व्यासपीठ के पूजन के साथ ही कथा रसामृत का आनंद लिया। भक्तिरस से सराबोर माहौल में महिलाओं ने होली के फाग और रंगरसिया के गायन के साथ खूब नाची झूमी।
सोमवार को व्यासपीठ से प्रवचन करते हुए श्री अकिंचन जी महाराज ने भक्तिरस से परिपूर्ण प्रवचन में सुदामा चरित्र पर चर्चा करते हुए कहा कि भगवान की निष्काम भाव से भक्ति करनी चाहिए। ईष्वर के सामने मांगने की आवष्यकता नहीं हैं वे स्वयं भक्त की भावना को समझते हैं। जिस तरह से सुदामा जी को भगवान ने बिना मांगे ही सबकुछ दे दिया उसी तरह से भगवान भक्त की भावना को समझते हैं। उन्होंने विद्या मान सम्मान या धन प्राप्ति का माध्यम नहीं बल्कि से विद्या से ज्ञान और ज्ञान से ईष्वर और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
सोमवार को सुदामा चरित्र, नवयोगेष्वर संवाद, 24 गुरुओं की कथा, परीक्षित मोक्ष और श्री शुकदेव जी की विदाई के साथ कथा का विश्राम दिया गया। श्रीमद्भागवत कथा विदाई पर हवन और भगवान की प्रसादी के साथ हुई।

