राजनीति में संघर्ष का जज्बा हो उसे आगे बढऩे से कोई नहीं रोक सकता। चाकसू से कांग्रेस विधायक वेदप्रकाश सोलंकी कुछ ऐसे ही व्यक्तित्व के धनी हैं। सोलंकी ने चाकसू की धरती पर कदम रखने के बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। एक बार टिकट नहीं मिला तो निराश नहीं हुए। पहली बार हार हुई तो उसे भी जीवन का कड़वा अनुभव मान चाकसू विधानसभा क्षेत्र के लोगों के बीच जमे रहे। धीरे-धीरे चाकसू विधानसभा क्षेत्र के लोगों में ऐसी पैठ जमाई की, जो लोग कहा करते थे कि सोलंकी चाकसू में क्या मांगता है। वे ही जिन्दाबाद के नारे लगाते घूम रहे हैं।
पायलट खेमे के प्रमुख सिपहसलार
वादे के पक्के वेदप्रकाश सोलंकी ने पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट से हर घड़ी में साथ देने और रहने का वादा किया था उस पर सोलंकी आज भी अडिग हैं। यह दीगर बात है कि बदली इन राजनीतिक परिस्थितियों के कारण उन्हें अपना पुराना घर(खेमा)छोडऩा पड़ा। राजनीति में आने वाले इन उतार चढ़ावों से वाकिफ सोलंकी आज पायलट खेमे के प्रमुख सिपहसलारों में गिने जाते हैं। वे ही एकमात्र व्यक्ति है जो बार-बार यह कहते हैँ कि टिकट सचिन पायलट ने दिया और मेरी जीत का श्रेय भी पूरा पायलट को हैं। चाकसू की जनता का तो प्रमुख योगदान है ही पर आज जो भी कुछ हूं वह पायलट के कारण हूं।
युवा नेता के रूप में पहचान
पायलट गुट के वेदप्रकाश सोलंकी को विधायकी के अलावा कोई अहोदा मिले अथवा नहीं। हां! सोलंकी का एक युवा नेता के रूप में जो उभार हुआ है उसकी तो स्वयं सोलंकी ने भी कभी कल्पना नहीं की होगी। उन्हें आज पूरा प्रदेश तो जानने लगा ही हैं। मीडिया के माध्यम से देश भी ये जानने लगा है कि पायलट समर्थक खरी-खरी सुनाने व बोलने वाला कोई वेदप्रकाश सोलंकी राजस्थान में हैं।
व्यक्तित्व में आया निखार,कोरोनाकाल में मुक्तहस्त से की सेवा
पायलट खेमे की ओर से विरोधियों को करारा जवाब देते रहने तथा जनता से जुड़े मुद्दों को बेवाक रूप से उठाने वाले सोलंकी के व्यक्तित्व में अब एक अलग ही निखार नजर आया हैं। कोरोनाकाल को ही ले तो सोलंंकी ने चाकसू में ही डेरा डाल दिया और सरकारी मदद का इंतजार किए बिना अपने संसाधनों व यार मित्रों से मदद जुटा जनता को कभी परेशान नहीं होने दिया। प्रतिदिन हजारों की तादाद में खाने के पैकेट,दवा आदि का बंदोबस्त तथा जरूरतमंदों के लिए राशन का प्रबंध उन्होंने बड़े ही मैनेजमेंट के विद्यार्थी की तरह किया। पढ़ाई के दौरान इवेंट मैनेजमेंट का डिप्लोमा उनके कोरोना काल में काम आया। दूसरी लहर में जब ऑक्सीजन,बैड की समस्या पैदा हुई तो उन्होंने सांवरिया अस्पताल को गोद ले उसमें संसाधन जुटा डाले।
टीम सोलंकी का योगदान भी कम नहीं
सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि चाकसू में उन्हें टीम भी ऐसी मिल गई जो जनसेवा के लिए रातदिन एक करने वाली हो। एक तेज तर्रार नेता के साथ प्रखर वक्ता के रूप में उभरे चाकसू विधायक वेदप्रकाश सोलंकी मंत्रियों और अधिकारियों से काम भी करवाना जानते हैं। जब 2008 के कालखण्ड में विधायक भी नहीं थे तब भी वे अपने प्रभाव से जनता के काम करवाये। सोलंकी के माने तो उनका कहना है कि मैंने जनता से जो वादे किए थे वे लगभग सारे काम हो गए। अब तो वे जनता से पूछते है कि क्या-क्या काम और करवाएं जा सकते हैं।
एनएसयूआई-युवा कांग्रेस से विधायकी तक का सफर
एनएसयूआई की छात्र राजनीति से निकले सोलंकी ने एनएसयूआई और उसके बाद युवा कांग्रेस में रहते लम्बा संघर्ष सड़कों पर किया हैं। जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन करने वाले सोलंकी का इस राजनीति से इतर सामाजिक सरोकारों में भी लम्बा जुड़ाव रहा हैं। वे मानसरोवर आदर्श मेला समिति के अध्यक्ष रहे हैं और दस वर्षों से भी अधिक समय तक दशहरा मेला आयोजित करते रहे हैं।
राजनीति में चौके-छक्के लगाने वाले खिलाड़ी
मेलों आदि में उन्होंने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर टीम जोड़ रखी थी। इन मेलों ने भी उनकी छवि को निखारने का काम किया। क्रिकेट के खिलाड़ी वेद सोलंकी अब राजनीति के सफल बल्लेबाज बन चौके-छक्के लगा रहे हैं। मातादीन सोलंकी के घर व बादामी देवी की कोख से जन्में वेदप्रकाश सोलंकी की धर्मपत्नी अनीता भी छात्र राजनीति में राजस्थान विश्वविद्यालय छात्रसंघ की संयुक्त सचिव रह चुकी हैं।
रक्तवीर सोलंकी
दो सुपुत्रों सानिध्य व तनिष्क के पिता सोलंकी रक्तवीर भी कहलाते हैं। सोलंकी ने 2002 से करीब 12 वर्षों से अधिक समय तक मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के जन्म दिन पर रक्तदान शिविरों का भी साकेत अस्पताल में आयोजन करते रहे हंै। जब लोग रक्त देने से घबराते थे उन दिनों सोलंकी ने लोगों को प्रोत्साहित कर रक्तदान करवाया हैं। अब भी वे रक्तदान को प्राथमिकता देते हैं। एक सुखद संयोग है कि चाकसू विधायक वेदप्रकाश सोलंकी के प्रशंसकों ने 12 अगस्त 2021 को उनके जन्म दिवस पर रक्तदान कैम्प का आयोजन किया हैं।




