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धारीवाल ने माकन के “मैं ही दिल्ली हूं ” के बयान की निकाली हवा,अन्य मंत्री भी हटाये जाने के बयानों से खफा

जयपुर। यूडीएच (UDH) मंत्री शांति धारीवाल ने कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं राजस्थान के प्रभारी अजय माकन के “मैं ही दिल्ली हूं ” के बयान की हवा निकालते हुए कहा कि राजस्थान में तो गहलोत ही सबकुछ। गहलोत जो करेंगे वो ही होगा। माकन ने मंत्रियों की ओर से संगठन में काम करने की इच्छा जताने के साथ स्वयं का हवाला देकर जो कहानी सुनाई वो गहलोत सरकार के मंत्रियों को रास नहीं आई। धारीवाल ने शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा के निर्वाचन क्षेत्र में जो बड़ी बात कही उसके स्वर तो साफ कह रहे हैं कि गहलोत ही उनके लिए आलाकमान हैं। धारीवाल मंत्री परिषद की बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डोटासरा को टका सा जवाब दे चुके हैं।

धारीवाल सबसे अनुभवी मंत्री

अपनी बेवाकी के लिए जाने पहचाने वाले धारीवाल गहलोत सरकार में न केवल सबसे अनुभवी मंत्री हैं, बल्कि विधानसभा में प्रतिपक्ष के मुकाबले में भी सक्षम हैं। संसदीय परम्परा, नियमों तथा कानूनों की भी गहरी समझ है, लिहाजा लाख शिकायतों के बावजूद उन्हें हटाया जाना मुश्किल दिखाई देता है। माकन के समक्ष जिन मंत्रियो की शिकायते आयी थी उसमे धारीवाल का नाम भी शामिल था।

मंत्री माकन की राजनीतिक यात्रा पर चुटकी लेने से नहीं चूक रहे

धारीवाल के इस बयान से उन मंत्रियों को सहारा मिला है जिन्हें मंत्रिमंडल से निकाले जाने का भूत सता रहा है। हालांकि, किसी अन्य मंत्री का माकन की यात्रा के बाद कोई बयान नहीं आया है। चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा व परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास माकन की उपस्थिति में हुई शिकायतों पर गुस्सा निकाल चुके हैं। चिकित्सा मंत्री ने कहा था कि मंत्रियों के कामकाज को लेकर खबरे छपवाई जा रही है इसी से खुशी मिलती है तो ये खुशी उन्हें मुबारक। खाचरियावास ने कहा था कि प्रेम से तो वे गर्दन तक काटने को तैयार हैं। हटाये जाने की सूची में शामिल अन्य मंत्री सार्वजनिक प्रतिक्रिया व्यक्त करने से तो बच रहे हैं पर व्यक्तिगत चर्चाओं में माकन की राजनीतिक यात्रा पर चुटकी लेने से नहीं चूक रहे।
एक मंत्री ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि माकन तो शुरू से असुंष्ट राजनीति करते रहे हैं। दिल्ली में स्व.शीला दीक्षित के खिलाफ मोर्चा खोले ही रखते थे। हाल में एक ट्वीट जिसमे शीलाजी का नाम था उसे रिट्वीट करने से भी नहीं चूके। अपने आपको आलाकमान “मैं ही दिल्ली हूं” कहने वाले माकन एक बार लोकसभा चुनाव के समय विदेश जाकर बैठ गए थे।

रायशुमारी जैसे आयोजनों से बचना चाहिए था

कांग्रेस के एक अन्य वरिष्ठ नेता ने कहा कि रायशुमारी के दौरान जो बाते मीडिया के माध्यम से उछली है वह कांग्रेस व सरकार दोनों के लिए अच्छी नहीं हैं। रायशुमारी जैसे आयोजनों से बचना चाहिए था। माकन ने भी मंत्रिमंडल व संगठन नियुक्तियों को लेकर बार-बार मीडिया के समक्ष जो बाते की है उसने भी माहौल खराब करने का काम किया है। सुलह के स्थान पर रिश्तों में व्यक्तिगत दरारे पड़ गयी है।

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