‘नाथी का बाड़ा’ के बाद अब ‘खाला का बाड़ा’…

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  • वीडियो वायरल होने के बाद खाला का बाड़ा आया ट्रेंड में
  • कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष डोटासरा व उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने किया एक-दूसरे पर पलटवार

जयपुर। सियासी हलकों में नाथी के बाड़ा के बाद अब खालाजी का बाड़ा की भी एंट्री हो गई है। शिक्षा मंत्री के बाद अब उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें राठौड़ खालाजी का बाड़ा… का जिक्र कर रहे हैं। यह वीडियो सुजानगढ़ उपचुनावों में प्रचार का बताया जा रहा है। इसमें राठौड़ कहते सुनाई दे रहे हैं- मेरी बात सुन लेना, तुम्हारे नेताजी को मैं मुंह से एक शब्द नहीं निकालने दूंगा। खालाजी का बाड़ा नहीं है यह। बताया जा रहा है कि राठौड़ सुजानगढ़ में छोटी नुक्कड़ सभा में भाषण दे रहे थे। इसी दौरान कुछ लोगों ने कांग्रेस के पक्ष में नारेबाजी कर दी। नाराज राठौड़ ने तब कहा कि यह खालाजी का बाड़ा नहीं है। सोशल मीडिया पर यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।

नाथी का बाड़ा और खालाजी का बाड़ा दोनों ही उदारता के प्रतीक
नाथी का बाड़ा और खालाजी का बाड़ा दोनों ​ही शब्द मारवाड़ और शेखावाटी क्षेत्र में रोजमर्रा की बोलचाल में खूब इस्तेमाल होते हैं। इन दोनों ही शब्दों का प्रयोग अति उदारता के लिए प्रयोग किया जाता है। यह अलग बात है कि दोनों नेताओं ने जिस तरह इन शब्दों का किया वहां उदारता कहीं दूर दूर तक नहीं थी। दोनों शब्दों के ऐतिहासिक संदर्भ भी हैं।

नाथीबाई का बाड़ा की कहावत
राजस्थान के पाली जिले के पालीवाल समाज 60 खेङा के एक छोटे से गांव भागेसर मे पालीवाल समाज के एक बाल विधवा नाथीबाई पालीवाल (तेजङ) गौत्र मुदगल से है। कहते है यह कहानी करीब डेढ़ सौ-दो सौ साल पहले की है कि नाथीबाई के विवाह के सालभर बाद ही उसके पति का देवलोक हो गये थे समाज की प्रथा के अनुसार पुनर्विवाह नही होने के कारण नातीबाई का घर परिवार गांव व खैङो मे नाथीबाई का बहुत ही आदर भाव व मान होता था मान आदर भाव के कारण परिवार व गांव के लोग कोई भी काम करते तो नाथीबाई को पुछ कर करते थे इस तरह धीरे धीरे उम्र दराज होते हुए नाथीबाई घर परिवार की मुखिया बन कर हर तरह लेन देनदारी करती रहती थी कहते है कि नाथीबाई के परिवार के पास अपार धन सम्पति होती थी नाथीबाई अपने पोल मे लकडी के पाट पर बैठी रहती थी कहते है कि किसी भी गांव या खैड़ा व किसी जाती के व्यक्ति के परिवार मे शादी-विवाह मायरा भात व कोई काम के लिए रुपयो पैसो की जरूरत होती तो हर आदमी नाथीबाई के पास आता था और रूपयो पैसो की जरूरत बताता तो नाथीबाई हाथ से एक बारी (अलमारी) की ओर इशारा करती कि जितने चाहिए उतने ले जा और कोई अन्य व्यक्ति आता और रूपयो पैसो की जरूरत बताता तो एक अन्य बारी (अलमारी) की ओर इशारा करती जितना चाहिए उतना ले जा इस प्रकार जिस किसी व्यक्ति को रूपयो पैसो की जरूरत होती तो हर व्यक्ति नाथीबाई के पास आता और नाथीबाई अलग अलग अलग बारियो की ओर इशारे करती थी और जिस व्यक्ति को जितने रूपयो पैसो की जरूरत होती अपने इच्छा अनुसार या जितनी जरूरत होती उतने ले जाता था और साल दो साल बाद हर व्यक्ति जिन्होने उधार पैसै लेकर गये थे अपने ईमानदारी से नाथीबाई के पोल मे आकर कहते नाथीबाई आपके ब्याज (सुद) समेत रूपयो लो तो नाथीबाई कहती जहा से लिए उसी बारी (अलमारी)मे रख जा इस प्रकार नाथीबाई के पास कोई हिसाब किताब व लेखा जोखा नही लिखा जाता था ना ही जिस व्यक्ति ने रूपयो लेकर गया उससे हिसाब पुछा जाता था इस प्रकार किसी भी प्रकार की लिखा पढी नही होती थी और कहते है कि नाथीबाई जिस किसी गांव या खैङो मे जाती थी तो वह जिस गांव मे रात्री विश्राम या ठहरती तो नाथीबाई पुरे गांव को खाना खिलाती थी।
गांव व खैङो के लोग नाथीबाई का आदर भाव बहुत मान रखते थे इस प्रकार नाथीबाई के बाड़ा वाली कहावत पड़ी कहते है कि नाथीबाई का देवलोक गमन होने के धीरे धीरे वह सारी धन दौलत व सम्पति लुफ्त होती गई आज भी पाली के भागेसर गाँव मे नाथीबाई के जेठ देवर का परिवार उसी पोल मे रहते है इस प्रकार आज हर क्षेत्र या ऐरिया कोई भी कहता कि ‘अठै कोई नाथीबाई को बाड़ा समझ रखा है क्या’।

क्या है खाला का बाड़ा
खाला का बाड़ा यानी मौसी का घर। मुस्लिम समुदाय में बच्चों के मामले में सबसे प्रिय खाला के घर को ही माना गया है। वहां न केवल बच्चों को सबसे अधिक प्यार -दुलार मिलता है अपितु बच्चों को  उदण्डी हरकते खाला के घर ही करने को मिलती है। यानी खुद के घर से ज्यादा स्वतंत्रता खाला के पर ही मिलती है। हालांकि ये कहावत वर्तमान में ज्यादा प्रचलित नहीं है। हां पूर्व मंत्री राजेन्द्र राठौड़ ने सुजानगढ़ में यह कहावत बोल इसे फिर से जिंदा कर दिया।

डोटासरा का तंज : यह चुनावी हार की बौखलाहट
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा- आपकी झुंझलाहट में सुजानगढ़ उपचुनाव में भाजपा की हार साफ दिख रही है। वैसे आपके प्रचार के भी क्या कहने, पिछले सभी उपचुनाव जहां आपको जिम्मेदारी मिली, वहां भाजपा की हार हुई और कुछ ऐसा ही सुजानगढ़ में होने जा रहा है। डोटासरा के इस ट्वीट के बाद राजेन्द्र राठौड़ ने पलटवार करते हुए ट्वीट किया कि जी, झुंझलाहट की परिभाषा आपसे बेहतर कोई नहीं जानता। भाजपा की चिंता छोड़िये, पहले अपने बिखरते कुनबे और कांग्रेस की डूबती नैय्या को बचाने में ध्यान दें।

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