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Shershaah :कैसे और कब ‘शेरशाह’ बने थे कैप्टन विक्रम बत्रा? जानिए पूरी कहानी

मुंबई: सिद्धार्थ मल्होत्रा और कियारा आडवाणी स्टारर फिल्म शेरशाह (Shershaah) रिलीज हो चुकी है। कारगिल वॉर हीरो शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा की जिंदगी पर आधारित फिल्म दर्शकों को खूब पसंद आ रही है।

कोडनेम शेरशाह

दरअसल कारगिल वॉर के दौरान 13 जैक रिफ (13 जम्मू एंड कश्मीर राइफल्स, जिस यूनिट में कैप्टन विक्रम बत्रा थे) को रिजर्व फोर्स से बदलकर युद्ध के मैदान में आगे भेजा गया था। ऐसे में वॉर पर जाने से पहले सभी को कोडनेम दिए गए थे, जो रेडियो कम्यूनिकेशन्स के लिए इस्तेमाल होने थे। ऐसे में महाराणा प्रताप, चाणक्य और संग्राम सहित कोडनेम दिए गए थे, जिनमें विक्रम बत्रा को शेरशाह (Shershaah) कोडनेम मिला था।

‘ये दिल मांगे मोर’ मोटो

13 जैक रिफ को प्वाइंट 5140 को रिकैप्चर करने का मिशन मिला था। वहीं कोडनेम देने के बाद सभी से विक्ट्री सिग्नल पूछा गया था- ऐसे में जहां कैप्टन संजीव जामवाल ने ‘ओ या या’ चुना तो कैप्टन विक्रम बत्रा ने ‘ये दिल मांगे मोर।’ जब याई के जोशी ने विक्रम ने इसकी वजह पूछी तो उन्होंने कहा था- ‘प्वाइंट 5140 के बाद मैं रुकने वाला नहीं हूं, मुझे भगाना है उनको यहां (देश) से।’

कैसी है फिल्म शेरशाह

शेरशाह, अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज हो चुकी है। शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा की जिंदगी पर आधारित इस फिल्म को जरूर देखना चाहिए। फिल्म में विक्रम के बचपन से लेकर कारिगल वॉर में दुश्मनों को खदेड़ते हुए देश पर आखिरी सांस न्यौछावर करने तक की कहानी को दिखाया गया है। सिद्धार्थ ने ऑनस्क्रीन विक्रम बत्रा का चार्म बनाया रखा है। करीब सवा दो घंटे की फिल्म देखकर एक ओर जहां आप देशभक्ति से लबरेज हो जाएंगे तो वहीं आपकी आंखों में आंसू भी जरूर आएंगे।

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