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दो बाल सखाओं में 3 और 13 पर हुई जमकर ट्वीटर जंग, हास्य व्यंग्य के साथ चले तीखे शब्द बाण

जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय जमाने के दो जीगरी दोस्तों में दलगत राजनीति को लेकर अदावत होती रहती है। इस बार ये जंग ट्वीटर पर हुई, इस ट्वीटर पर चली इस अदावत को जिसने भी देखा उसने भी चटकारे जमकर लिए।

जमकर शब्दबाण चलाए दोनोंं ने

प्रदेश में चल रही सियासी उठापटक के बीच वर्तमान स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा और प्रतिपक्ष में उपनेता राजेंद्र राठौड़ ने एक दूसरे पर जमकर शब्दबाण चलाएं। शुरूआत स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा ने राठौड़ पर निशाना साधकर की, बाद में ट्वीटर पर दोनों के बीच वार पलटवार चलता रहा। रघु शर्मा ने कहा-राजेंद्र राठौड़ न तीन में न तेरह में, न वसुंधरा राजे के खेमे में, न सतीश पूनिया के खेमे में।

मैं 7 बार और आप 2 बार ही विधानसभा पहुच पाए-राठौड़

रघु शर्मा के इस बयान का राजेंद्र राठौड़ ने ट्वीटर पर पलटवार करते हुए लिखा- चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा जी, आपने ठीक कहा ना मैं 3 में हूं और ना ही 13 में। मैं भाजपा कार्यकर्ता के रूप में जनता के अपार प्रेम और आशीर्वाद की बदौलत लगातार सातवीं बार विधायक निर्वाचित हुआ हूं। मगर मेरे साथ राजनीतिक सफर शुरु करने वाले मित्र आपकी कार्यशैली तो ऐसी रही है कि आप 7 चुनाव लड़कर मात्र 2 बार ही विधानसभा में पहुंच पाए।

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डॉ.रघु ने दिलाई 1980 व 85 की याद

इस पर रघु शर्मा ने राठौड पर कटाक्ष करते हुए लिखा- राजेन्द्र राठौड़ जी, पहला चुनाव आपने 1980 में जनता दल से भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष स्व. जगदीश प्रसाद माथुर को हराने के लिए लड़ा। जिसमें आपको मात्र 2000 वोट आए। उसके बाद 1985 में ही जनता दल से ही चूरू से चुनाव लड़ा और आपकी ज़मानत ज़ब्त हो गई। उसके बाद हुए चुनाव में आप जनता दल से जीते और पार्टी का विघटन करके आप भाजपा में चले गए। मैं तीन चुनाव जीता जिसमें एक अजमेर लोकसभा का भी चुनाव शामिल है जिसमें आठों विधानसभाओं से भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा। आप भी प्रदेश के चिकित्सा मंत्री रहे हो और जब व्यवस्थाएं आपसे नही संभली और अधिकारी आपकी नही सुनते थे तो आपको कोटा में कहना पड़ा की मैं शर्मिंदा हूं कि मैं राज्य का चिकित्सा मंत्री हू, वह बात भी आपको नहीं भूलनी चाहिए।

ना इतराओ इतना, बुलंदियों को छूकर…

राजेंद्र राठौड़ ने रघु शर्मा के जवाब पर फिर पलटवार करते हुए शायराना अंदाज में लिखा- ना इतराओ इतना, बुलंदियों को छूकर, वक्त के सिकन्दर पहले भी कई हुए हैं,जहां होते थे कभी शहंशाह के महल,देखे हैं वहीं, अब उनके मकबरे बने हुए हैं। आपकी याददाश्त शायद कमजोर हो गई। 1985 के चुनावों में मैं चूरू से लगभग 5000 वोटों से हारकर दूसरे नंबर पर था और उसके बाद कभी हार नहीं देखी। आगे राठौड़ ने लिखा- हाथ कंगन को आरसी क्या, पढ़े लिखे को फ़ारसी क्या, तेल देखो, तेल की धार देखो। समय का चक्र घूम रहा है, अगले चुनाव में ढाई साल बाद फिर किसी मोड पर चुनाव का इतिहास लिखा जाएगा। अग्रिम शुभकामनाएं मेरे छात्र जीवन के मित्र।

जिनके घर शीशे के होते हैं…

रघु शर्मा ने लिखा- जिनके घर शीशे के होते हैं वे बाल सखाओं पर पत्थर नहीं फैंका करते। राठौड़ के पलटवार के बाद रघु शर्मा ने फिर जवाब दिया। रघु शर्मा ने लिखा- मेरे दोस्त, मेरे सखा, मेरे सम्माननीय जिनके स्वयं के घर शीशे के बने होते हैं वह बाल सखाओं पर पत्थर नहीं फैंका करते। इसके बाद शायराना जवाब देते हुए लिखा- “ना डरा मुझे ए दोस्त…नाकाम होगी तेरी हर कोशिश…जिंदगी के मैदान में खड़ा हूं,दुआओं का काफिला लेकर…! उजाले हमारी यादों के तुम्हारे साथ रहने दो, ना जाने जिंदगी की किस गली में शाम हो जाए।

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